Skip to main content

महिलाएं फाइनेंस को टैबू विषय समझना बंद करें, कोरोना ने मौका दिया है कि वो भी पैसों से दोस्ती करें, बचत के बीज बोएं

हाल ही में एक दुखद समाचार पढ़ा। 51 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कोविड के कारण मौत हो गई। रिपोर्ट में उनकी बीवी और 12 साल के बच्चे की फोटो छापी गई थी। उनको देखकर मन उदास हुआ। मगर सबसे ज्यादा उदासी इसपर हुई, जो बिल्कुल आखिर लिखा थी: ‘मुझे इनके फाइनेंस, इंवेस्टमेंट के बारे में कोई ज्ञान नहीं। पता नहीं हमारा खर्च कैसे चलेगा।’ मोहतरमा पढ़ी-लिखी दिख रही थीं।

मगर देश की अधिकतर पढ़ी-लिखी औरतों की तरह, उन्होंने पैसे को टैबू सब्जेक्ट बनाया हुआ है। बैंक अकाउंट में उनका नाम होगा, पर इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड पता नहीं होगा। पेटीएम, भीमएप से पैसे ट्रांसफर कैसे करते हैं उनको कोई आइडिया नहीं। ये कोई मुश्किल काम नहीं पर माहौल ही कुछ ऐसा है।

अधिकतर घरों में एक अनरिटन रूल है: मनी मैटर मतलब आदमी का डोमेन। ज्यादातर कामकाजी महिलाओं के साथ भी ऐसा ही है। और उन्हीं की मर्जी से। शायद बचपन से घर में यही देखा कि पिताजी कमाते हैं और बैंक का काम करते हैं। तो कहीं न कहीं, सब-कॉन्सियशस लेवल पर ये हमारी साइकोलॉजी बन गई। ऐसा मेरा ऑब्जर्वेशन और तजुर्बा है।

पिछले दशक में बहुत सारे इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस आए हैं, उनका लेडीज़ को ज्ञान नहीं है। जानकारी इंटरनेट पर है तो सही, मगर क्या सही-क्या गलत समझ नहीं पाती हैं। चाहे वो हाउसवाइफ है या वर्किंग, घर के कामकाज का जिम्मा उसके सिर पर ही है। नौकर भी लेडी से ही पूछेगा, ‘भाभी, खाने में क्या बनाऊं।’ ऐसे में शायद कई महिलाओं ने सोचा कि फाइनेंस का काम हसबैंड को देखने दो। दूसरा ये कि औरत की कमाई क्या सचमुच उसकी होती है?

जो कंट्रोलिंग हसबैंड्स हैं वे उसे अपनी ही पूंजी समझकर इस्तेमाल करते हैं। और जहां हसबैंड अंडरस्टैंडिंग हैं, वहां औरत को अहसास है कि कहीं पैसों की वजह से कोई दरार ना पड़ जाए। तो चलो, उन्हें ही संभालने दो इन्वेस्टमेंट। कभी कुछ लॉस भी हो गया तो मुझे सुनना तो नहीं पड़ेगा! जो लड़कियां इंजीनियरिंग या एमबीए करके निकली हैं, उनका माइंडसेट थोड़ा बदला है। लेकिन शादी के बाद थोड़ी गड़बड़ हो जाती है। खासकर जब वे बच्चे के लिए जॉब छोड़ देती हैं। हसबैंड-वाइफ में किटकिट होती है। अगर उसी लड़की ने कुछ इन्वेस्टमेंट किए होते तो वो दिन ना देखना पड़ता। सेविंग्स की आदत कम उम्र से शुरू करें, ये स्कूल और कॉलेज में सिखाया जाए।

असल बात ये है कि घर के कामकाज में जेंट्स हाथ बंटाएं और फाइनेंस में लेडीज़ इंट्रेस्ट लें। कोरोना की वजह से कई घरों में थोड़ा चेंज आया है। मेरे क्लास के कई लड़के (यानी सीईओ) आजकल किचन में बर्तन मांजने का बोझ उठा रहे हैं। थोड़ा कंप्लेंट करते हैं पर हंसते हुए। यही मौका है कि बीवियां बैंकिंग और इन्वेंस्टमेंट की बातें समझ लें। ये कोई रॉकेट साइंस नहीं, कॉमन सेंस की चीज है।

शुरू में थोड़ा डर लगेगा, पर कुछ दिन बाद अहसास होगा कि मेंटल ब्लॉक था, जब आप इतनी एफिशिएंसी से घर-परिवार चला सकती हैं तो यहां भी अपना योगदान दें। कई बार आदमी लालच में गलत स्कीम में पैसा डाल देता है। जैसे चिट फंड्स या टिप्स के बेसिस पर वीक शेयर खरीदेगा। आपका स्वभाव उनसे अलग है, फालतू के रिस्क लेने से रोक सकते हैं।

अगर हसबैंड में पेशेंस नहीं है तो किसी ऑनलाइन कोर्स में भर्ती होकर सीख सकती हैं। जब आप विश्वास के साथ म्यूचुअल फंड्स की एनएवी के बारे में डिनर टेबल पर बात छेड़ेंगी, तो धीरे-धीरे उनको भी आपकी फाइनेंशियल आईक्यू पर विश्वास हो जाएगा।

तो बात एकदम छोटी-सी है। पैसों से दोस्ती करें और सेविंग्स के बीज समझदारी से बोएं। और एक दिन मीठे फल का आनंद जरूर मिलेगा। भगवान न करे अगर कभी बुरा दिन देखना पड़े, तो आप किसी की मोहताज न हों। अबला नारी नहीं, शक्तिरूपा बनें, जो हर परिस्थिति का दृढ़ता से सामना करने केलायक है।

(यह लेखिका के अपने विचार हैं)



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर।


https://ift.tt/3gqdVvS

Comments

Popular Posts

कंगना मामले में हरामखोर का मतलब नॉटी बताकर हाईकोर्ट में घिरे शिवसेना नेता; पुरुषोत्तम ने मर्यादा तोड़ी, पत्नी को पीटा; चीन में जबर्दस्ती कोरोना के टीके

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव अनुपम हाजरा का कहना है कि अगर ममता बनर्जी कोरोना संक्रमित होती हैं तो वो उन्हें गले लगा लेंगे। उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत हुई है। वहीं, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों के धरने में पहुंचे। कहा- भाजपा पूंजीपतियों के हित देखती है। सारा खेल जरूरत का है। बहरहाल, शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ... आज इन 7 इवेंट्स पर रहेगी नजर 1. IPL में सनराइजर्स हैदराबाद और दिल्ली कैपिटल्स आमने-सामने होंगे। टॉस शाम 7 बजे होगा। मैच शाम साढ़े 7 बजे शुरू होगा। 2. एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती और उसके भाई शोविक चक्रवर्ती की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। 3. आज देर रात अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर डोनाल्ड ट्रम्प और जो बाइडेन के बीच पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट होगी। 4. प्रधानमंत्री मोदी उत्तराखंड में नमामि गंगे मिशन के तहत 6 मेगा प्रोजेक्ट का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिलान्यास करेंगे। 5. मध्यप्रदेश की 28 विधानसभा सीटों समेत 56 सीटों पर उपचुनाव की तारीखें आज तय हो सकती हैं। 6. पंजाब में कृषि विधेयकों के विरोध में प्रदर्शन होगा। इसी मुद्दे पर छ...

पढ़िए, टाइम मैग्जीन की इस हफ्ते की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

1. कोरोना वायरस महामारी के नए उफान ने डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। अमेरिका के 12% स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं, वहीं ब्रिटेन में 40% से अधिक डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। समस्याओं के मुख्य केंद्र जानने के लिए पढ़ें ये लेख... अमेरिका में 800 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत, ब्रिटेन में 40% डॉक्टर मानसिक बीमारियों से पीड़ित 2. टाइम मैग्जीन ने 2020 की सर्वश्रेष्ठ किताबों की सूची जारी की है। इसमें भारतीय मूल की दो लेखिकाओं- मेघा मजूमदार और दीपा अनप्परा के उपन्यासों को शामिल किया है। इनमें से सात किताबों का ब्योरा पेश है इस लेख में... 2020 की 100 सर्वश्रेष्ठ किताबों की सूची, भारतीय मूल के दो लेखकों की किताबें शामिल 3. गेम कंसोल प्ले-स्टेशन का नया स्पाइडरमैन गेम अमेरिका में रंगभेद की झलक को दर्शाता है। प्ले-स्टेशन वीडियो गेम का स्पाइडरमैन अश्वेत है। रोमांच से भरपूर इस गेम का क्या है मुख्य आकर्षण जानें इस लेख में... प्लेस्टेशन वीडियो गेम का स्पाइडरमैन अश्वेत है 4. अमेरिका में कोरोना वायरस के दोबारा तेजी से फैलने के बीच पर्यटन ...

आजाद भारत में जन्म लेने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री मोदी का आज जन्मदिन; 72 साल पहले हैदराबाद का भारत में विलय हुआ था

चायवाले से प्रधानमंत्री पद का विलक्षण सफर तय करने वाले नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म आज ही के दिन 1950 में हुआ था। गुजरात के वडनगर में एक गरीब परिवार में वे पैदा हुए। पिता दामोदरदास मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। नरेंद्र मोदी भी बचपन में उनकी मदद करते थे। मोदी अचानक राजनीति में नहीं आए। आठ साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े। 1971 में संघ का पूर्णकालिक कार्यकर्ता बनने के बाद उनकी राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा शुरू हुई। 1975 में आपातकाल के दौरान छिपकर वक्त गुजारना पड़ा। 1985 में भाजपा में संगठन का काम मिला। गुजरात के भुज में आए भूकंप के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं, तब 2001 में मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया। गुजरात दंगों को लेकर आरोपों से घिरे। लेकिन, गुजरात के विकास मॉडल को बेस बनाकर केंद्र की राजनीति में आए और 2014 में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी पार्टी यानी भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई। 2019 में पहले से बेहतर प्रदर्शन के साथ सत्ता में लौटे। हैदराबाद के विलय के 72 साल सरदार पटेल और हैदराबाद के निज...