Skip to main content

गुड़गांव में लॉकडाउन-4 में तीन गुना हुए कोरोना संक्रमित, यहां थाने में घुसने से पहले पुलिसवालों के जूतें भी होंगे सैनिटाइज

हरियाणा में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 1923 मरीज पॉजिटिव मिल चुके हैं। इस समय कोरोना का हॉट स्पॉट गुड़गांव बन गया है। लॉकडाउन-4 में गुड़गांव के अंदर तीन गुना कोरोना संक्रमित मरीज बढ़ गए हैं। यानि महज 13 दिन में मरीज तीन गुना हो गए 677 पहुंच गए हैं। ऐसे में जिला प्रशासन से लेकर पुलिस तक के लिए चुनौती खड़ी हो गई है।

अब पुलिसकर्मियों के जूते भी होंगे सैनिटाइज
गुड़गांव में अब पुलिसकर्मी थानों में सीधे जूते पहनकर नहीं जाएंगे। उन्हें सबसे पहले अपने जूते थाने के बाहर सैनिटाइज करने पड़ेंगे। उनके जूतों को कैमिकल में रखा जाएगा। इसके बाद ही उन्हें पहनने की अनुमति दी जाएगी। पुलिस आयुक्त मोहम्मद अकील ने ये आदेश जारी किए हैं।

पुलिस आयुक्त मोहम्मद अकील ने का कहना है कि संक्रमित मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद अब डॉक्टर थानों में हर पुलिसकर्मियों की जांच करेंगे। पुलिसकर्मियों के लक्षण को देखेगें और उनके सैंपल भी लिए जाएंगे।

गुड़गांव में लॉकडाउन-4 के दौरान संक्रमित में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
गुड़गांव में पहले 100 मरीज 53 दिन में आए थे जबकि लॉकडाउन की बात करें तो तीसरे चरण में यहां कुल मरीजों की संख्या 203 थी लेकिन चौथे चरण में आंकड़ा 677 जा पहुंचा है। चौथे चरण में गुड़गांव के अंदर हॉट स्पॉट भी बढ़कर 63 हो गए हैं। पहले चरण में हॉट स्पॉट की संख्या 0 थी। दूसरे चरण में 9, तीसरे में 35 थी। अब पांचवा चरण जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और सरकार के लिए चिंता का विषय है, जब बहुत सी छूट दे दी गई हैं।

हरियाणा में मरीजों का आंकड़ा 1923 पहुंचा

  • अमेरिका से लौटे 21 कोरोना पॉजिटिव के साथ गुड़गांव में 677, फरीदाबाद में 339, सोनीपत में 199, झज्जर में 97, नूंह में 70, अंबाला में 50, पलवल में 58, पानीपत में 61, पंचकूला में 26, जींद में 27, करनाल में 50, रोहतक में 31, महेंद्रगढ़ में 39 रेवाड़ी में 23, सिरसा में 15, फतेहाबाद में 15, यमुनानगर में 9, हिसार में 31, कुरुक्षेत्र में 27, भिवानी में 13, कैथल में 18, चरखी-दादरी में 13 संक्रमित मरीज हैं। इसके अलावा, मेदांता अस्पताल गुड़गांव में 14 इटली के नागरिकों को भी भर्ती करवाया गया था, जिन्हें हरियाणा ने अपनी सूची में जोड़ा है।
  • हरियाणा में अब कुल 971 मरीज ठीक हो गए हैं। इनमें गुरुग्राम में 224, फरीदाबाद में 153, सोनीपत में 146, नूंह में 65, झज्जर में 92, अंबाला में 40, पलवल 41, पानीपत में 37, पंचकूला में 25, जींद में 24, करनाल में 20, यमुनानगर में 8, सिरसा में 9, रोहतक में 11, महेंद्रगढ़ में 19, भिवानी में 6, हिसार में 5, कैथल में 5, फतेहाबाद में 7, कुरुक्षेत्र में 13, चरखी दादरी में 1, रेवाड़ी में 4 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। 14 मरीज इटली के भी ठीक हुए हैं। अमेरिका से लौटे 2 मरीज ठीक हुए हैं।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
हरियाणा में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों के बीच हर दिन बड़ी संख्या में टेस्ट किए जा रहे हैं। इस समय 1 लाख से ज्यादा टेस्ट पूरे प्रदेश में किए जा चुके हैं।


https://ift.tt/2ZQD6Sa

Comments

Popular Posts

आप शेयर ट्रेडिंग करते हैं तो यह जानना आपके लिए जरूरी है; एक सितंबर से बदल रहा है मार्जिन का नियम

शेयर बाजार में एक सितंबर से आम निवेशकों के लिए नियम बदलने वाले हैं। अब वे ब्रोकर की ओर से मिलने वाली मार्जिन का लाभ नहीं उठा सकेंगे। जितना पैसा वे अपफ्रंट मार्जिन के तौर पर ब्रोकर को देंगे, उतने के ही शेयर खरीद सकेंगे। इसे लेकर कई शेयर ब्रोकर आशंकित है कि वॉल्युम नीचे आ जाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह नया नियम और आपकी ट्रेडिंग को किस तरह प्रभावित करेगा? सबसे पहले, यह मार्जिन क्या है? शेयर मार्केट की भाषा में अपफ्रंट मार्जिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक है। यह वह न्यूनतम राशि या सिक्योरिटी होती है जो ट्रेडिंग शुरू करने से पहले निवेशक स्टॉक ब्रोकर को देता है। वास्तव में यह राशि या सिक्योरिटी, बाजारों की ओर से ब्रोकरेज से अपफ्रंट वसूली जाने वाली राशि का हिस्सा होती है। यह इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग से पहले वसूली जाती है। इसके अलावा स्टॉक्स में किए गए कुल निवेश के आधार पर ब्रोकरेज हाउस भी निवेशक को मार्जिन देते थे। यह मार्जिन ब्रोकरेज हाउस निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी। इसे ऐसे समझिए कि निवेशक ने एक लाख रुपए के स्टॉक्स खरीदे हैं। इस...

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...