Skip to main content

पेट की आग बुझाने के लिए तपती सड़क पर पलायन, भीषण गर्मी से बेहाल मजदूरों का सफर और नन्हें कंधों ने उठाया 'हिंदुस्तान'

रह-रह आंखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी, आगे और बढ़े तो शायद दृश्य सुहाने आएंगे...

ख्यात कवि और शायर दुष्यंत ने कविता की ये पंक्तियां शायद ऐसे ही किसी दृश्य की परिकल्पना कर लिखी होंगी। तस्वीर बुधवार दोपहर तीन बजे तहसील क्षेत्र से क्लिक की गई। 45.2 डिग्री तापमान के बीच सड़क पर कर्फ्यू सा सन्नाटा था। ऐसे में एक वृद्ध दिव्यांग जरूरतमंद पेट के लिए आग सी तपती सड़क पर पेट पलायन करते हुए आगे बढ़ रहा था, ताकि दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो सके। सूनी सड़क पर बुजुर्ग इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहा था कि आगे शायद कुछ लोग मिलें जो उसकी मदद कर सकें।

बच्चे 44 डिग्री तन झुलसा देने वाली तेज धूप में नंगे पांव

तस्वीर राजस्थान के सिरोही की है। जिलेभर में गर्मी अपना रौद्र रुप दिखा रही है। बुधवार को केरल से प्रवासियों को लेकर पिंडवाड़ा रेलवे स्टेशन पर पहुंची स्पेशल ट्रेन से उतरे प्रवासियों के भीषण गर्मी से हाल बेहाल नजर आए। ट्रेन से अपनी मां के साथ उतरे दो बच्चे 44 डिग्री तन झुलसा देने वाली तेज धूप में नंगे पांव प्लेटफार्म पर चल रहे थे। चेहरे पर गर्मी से जल से पैरों के भाव साफ नजर आ रहे थे।

पिता का दर्द-बेटे ने कहा था मन नहीं लग रहा, घर आ रहा हूं...अब कभी नहीं आएगा

तस्वीर रांची की है। बुधवार सुबह 10:30 बजे गोवा के करमाली से श्रमिक स्पेशल ट्रेन हटिया पहुंची तो पता चला कि एस-15 में सफर कर रहे एक 19 वर्षीय युवक की मौत हो चुकी है। चौंकाने वाला ये है कि युवक की तबीयत मंगलवार रात बिलासपुर के पास बिगड़ी थी। रात 1 बजे के आस-पास उसकी मौत हुई। ट्रेन बिलासपुर से हटिया के बीच 70 स्टेशन क्रॉस कर गई, किसी ने न ट्रेन रोकी ना प्रशासन को सूचित किया।

कंधे पर उठा 'हिन्दुस्तान’

बीकानेर का लालगढ़ रेलवे स्टेशन। प्लेटफाॅर्म पर बिहार के मधुबनी जाने काे तैयार श्रमिक स्पेशल। बदहवास-से ट्रेन की ओर बढ़ रहे युवक के कंधे वाले बड़े थैले पर नजर टिक गई। ब्रांडनेम छपा था-हिंदुस्तान फीड्स। नजर मिली ताे आंखाें की मायूसी साफ दिख गई। यूं ही पूछ लिया-कहां जा रहे हाे? बगैर एक पल साेचे कह गया ‘अपने देस’। ‘हिंदुस्तान’ काे कंधाें पर उठाए उसने थके कदमाें में पूरी जान झाेंकी और ट्रेन की तरफ तेजी से बढ़ गया।

ईद के दिन निकला था बस में, भरी गर्मी में तबीयत बिगड़ गई, मौत

रायपुर के टाटीबंध में एक मज़दूर की मौत हो गई। इसका नाम हिफजुल रहमान (29) था। ईद के दिन मुंबई से बस में बैठकर हावड़ा के लिए निकला था। छत्तीसगढ़ की सीमा पर बस बदलकर रायपुर पहुंचा था। 44-45 डिग्री पारा में बस के इस सफर ने उसकी ताकत इतनी छीन ली, कि जब वो रायपुर पहुंचा, तो सड़क के किनारे पहले बैठ गया, फिर सिर को पकड़ा और फिर लेट गया। इसके बाद उठ ही नहीं सका। इस दौरान अपने साथियों से बार-बार कहता रहा, भाई, घर कब पहुंचेंगे।

मजदूर की नेपाल में मौत, शव गांव नहीं आ पाया तो परिवार ने मिट्‌टी का पुतला बना निभाई रस्में

तस्वीर झारखंड के गुमला की है। नेपाल के परासी जिले में एक ईंट भट्‌ठे में 23 मई को सिसई के एक मजदूर खद्दी उरांव की मौत हो गई। 22 मई को उसकी तबीयत बिगड़ी। साथ काम करने वाला छोटा भाई विनोद उरांव और अन्य साथी 23 मई को अस्पताल ले गए, मगर इलाज नहीं हो सका। खद्दी का शव सिसई में उसके गांव छारदा लाना संभव नहीं था। छोटे भाई ने नेपाल में ही दाह-संस्कार कर दिया। गांव में खद्दी की पत्नी व बच्चे अंतिम दर्शन नहीं कर पाए। भाई बासुदेव उरांव ने बताया कि गांव में परिवार ने मिट्‌टी का पुतला बना उसी का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।

मुश्किलों के जाल में जिंदगी

तस्वीर चंडीगढ़ की है। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए गांव छोड़ शहर आए। काम-धंधे सेट किए, लेकिन कोरोना आया तो सब बिखर गया। जहां काम करते थे, वे बेगाने हो गए। अब एक ही रास्ता बचा था। ट्रेन पकड़ चल दिए अपने गांव की ओर। चंडीगढ़ से रोज हजारों लोग बिहार-यूपी जा रहे हैं। ये कहते हैं कि गांव में जिंदगी आसान थोड़ी है। और मुश्किलें आएंगी। लेकिन जाना ही पड़ेगा, क्योंकि यहां तो फिलहाल जिंदगी ज्यादा ही उलझ गई है।

मां के आंचल का सहारा

अमृतसर के महाराजा रिजॉर्ट में स्क्रीनिंग करवाने पहुंचा प्रवासी परिवार गर्मी में अपने बच्चे के पैरों को पानी से साफ करते हुए ताकि बच्चे को गर्मी से बचाया जा सके।

सड़क पर डामर पिघलने लगा

नाैतपा के तीसरे दिन बुधवार काे भी राजस्थान सहित उत्तर भारत के अधिकांश हिस्साें में आसमां से आग बरसती रही। चूरू में पारा दूसरे दिन बुधवार काे भी 50 डिग्री के करीब रहा। यहां 0.4 डिग्री की गिरावट के साथ बुधवार काे दिन का तापमान 49.6 डिग्री रहा। इस गिरावट ने चूरू काे दुनिया के सबसे गर्म शहर से ताे दूसरे नंबर पर पहुंच दिया, लेकिन देश में सबसे गर्म शहराें में टाॅप पर शुमार रहा। यहां सड़कों का डामर पिघलने लगा।

न कांधा, न मुखाग्नि, चिता के भी 100 फीट दूर से दर्शन

तस्वीर राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की है। जहां चार दिन पहले कोरोना संक्रमित महिला 65 वर्षीय वनिता भावसार की मौत हो गई। उनका मेडिकल प्रोटोकाल के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। काेराेना वायरस ने महिला के परिजनों को मौत से बड़ा दर्द दिया है। न मुखाग्नि और न कोई अंतिम क्रिया। सीधे अस्पताल से प्लास्टिक किट की पैकिंग में महिला के शव काे कागदी श्मशान घाट लाया गया। चिता भी परिजनों को करीब 100 फीट दूर से देखने की अनुमति मिली। महिला का छाेटा बेटा कुवैत में है, वह आ नहीं सका। ऐसे में बड़ा बेटा अंतिम दर्शन के नाम पर वीडियो कॉल से उसे आगे की लपटें ही दिखा पाया।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
To extinguish the stomach fire, migrating on the scorching road, the journey of laborers suffering from the scorching heat and the little ones took up 'Hindustan'


https://ift.tt/3gtW1Iy

Comments

Popular Posts

आप शेयर ट्रेडिंग करते हैं तो यह जानना आपके लिए जरूरी है; एक सितंबर से बदल रहा है मार्जिन का नियम

शेयर बाजार में एक सितंबर से आम निवेशकों के लिए नियम बदलने वाले हैं। अब वे ब्रोकर की ओर से मिलने वाली मार्जिन का लाभ नहीं उठा सकेंगे। जितना पैसा वे अपफ्रंट मार्जिन के तौर पर ब्रोकर को देंगे, उतने के ही शेयर खरीद सकेंगे। इसे लेकर कई शेयर ब्रोकर आशंकित है कि वॉल्युम नीचे आ जाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह नया नियम और आपकी ट्रेडिंग को किस तरह प्रभावित करेगा? सबसे पहले, यह मार्जिन क्या है? शेयर मार्केट की भाषा में अपफ्रंट मार्जिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक है। यह वह न्यूनतम राशि या सिक्योरिटी होती है जो ट्रेडिंग शुरू करने से पहले निवेशक स्टॉक ब्रोकर को देता है। वास्तव में यह राशि या सिक्योरिटी, बाजारों की ओर से ब्रोकरेज से अपफ्रंट वसूली जाने वाली राशि का हिस्सा होती है। यह इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग से पहले वसूली जाती है। इसके अलावा स्टॉक्स में किए गए कुल निवेश के आधार पर ब्रोकरेज हाउस भी निवेशक को मार्जिन देते थे। यह मार्जिन ब्रोकरेज हाउस निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी। इसे ऐसे समझिए कि निवेशक ने एक लाख रुपए के स्टॉक्स खरीदे हैं। इस...

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...