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मंदी में नौकरी गई, पत्नी के जेवर बेच फैक्ट्री लगाई, अब टर्नओवर 100 करोड़ रुपए हुआ

कोरोना काल में जब नौकरियां जा रही हैं, ऐसे में उत्तराखंड के हर्षपाल सिंह चौधरी की कहानी किसी आदर्श से कम नहीं है। साल 2007 की वैश्विक मंदी में उनकी नौकरी छिन गई थी। तब उन्हें 6700 रुपए सैलरी मिलती थी, लेकिन हर्षपाल निराश नहीं हुए। उन्होंने पत्नी के गहने बेचकर 2 लाख रुपए जुटाए और हर्बल प्रोडक्ट बनाने की एक छोटी फैक्ट्री शुरू की।

आज इनकी कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ रु. पहुंचने जा रहा है। इन्होंने अपने पूरे गांव को रोजगार दिया है। हर्षपाल उत्तराखंड के छोटे किसान परिवार से हैं। माइक्रोबायोलॉजी और फूड सैंपलिंग की पढ़ाई करने के बाद 1994 में उन्होंने हेल्थ केयर और फूड सैंपलिंग सेक्टर में नौकरी शुरू की थी।

स्टार्टअप शुरू करने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे- चौधरी

सोनीपत में उनकी नाैकरी ठीक चल रही थी कि 2006 में मंदी की आहट सुनाई देने लगी। वे बताते हैं कि तब मेरे पास पैसे नहीं थे, लेकिन मैं स्टार्टअप शुरू करना चाहता था। मैंने पत्नी बीना के गहने बेच दो लाख रुपए जुटाए। इन पैसों से गुजरात के नवसारी में एक छोटी फैक्ट्री डाली। बीना इसका काम देखने लगी और मैंने नौकरी जारी रखी।

पहला ऑर्डर अमेरिका से अनार के जूस से 2 किलो पाउडर तैयार करने का मिला। इस बीच मेरी नौकरी चली गई। मैं फैक्ट्री के काम में लग गया और हर्बल प्रोडक्ट्स एब्सट्रैक्ट की ट्रेडिंग के लिए अंबे फाइटोएस्ट्रैक्ट्स कंपनी शुरू की। काम बढ़ने लगा तो बड़ी फैक्ट्री की जरूरत महसूस हुई।

छह लोगों से शुरू फैक्ट्री में अब 100 लोग हैं

जमीन खरीदने के लिए दो करोड़ रुपए की जरूरत थी। इतना पैसा नहीं था। इसलिए मैंने उत्तराखंड में पौड़ी गढ़वाल के अपने गांव जामरिया में पैतृक जमीन पर फैक्ट्री लगाने का फैसला किया। गांव में दो करोड़ की मशीनें लगाईं। इस इलाके में यह पहली फैक्ट्री थी। 2012 में फैक्ट्री तैयार हो गई। कच्चे माल के लिए गांव के लोगों को ही ट्रेनिंग दी। छह लोगों से शुरू फैक्ट्री में अब 100 लोग हैं। अधिकतर गांव के ही हैं।

अमेजन से डील की...

हर्षपाल की कंपनी में तैयार आंवला, हल्दी, अदरक, गिलोय, तुलसी, एलोवेरा, काली मिर्च समेत 100 प्रोडक्ट्स का अर्क पूरी दुनिया में जाता है। हर्षपाल ने अमेजाॅन के साथ सैनिटाइजर की डील की है।



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आज हर्षपाल सिंह चौधरी की कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ रु. पहुंचने जा रहा है। इन्होंने अपने पूरे गांव को रोजगार दिया है।


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