Skip to main content

लंबी रिंग फिंगर वाले पुरुषों को मौत का खतरा कम, 41 देशों के पुरुषों पर हुई रिसर्च से पता चला

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कोरोना के संक्रमण और उंगुलियों के बीच एक कनेक्शन ढूंढ़ने का दावा कियाहै। उनका कहना है कि ऐसे पुरुष जिनकी रिंग फिंगर (अनामिका) लम्बी है उन्हें कोविड-19 से मौत का खतरा कम है।

डेली मेल की खबर के मुताबिक यह दावा ब्रिटेन की स्वानसी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 41 देशों के पुरुषों पर हुई रिसर्च के बाद किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, छोटी रिंग फिंगर वाले पुरुषों में कोरोनावायरस के संक्रमण के बाद हल्के ही लक्षण देखे गए।


छोटी रिंग फिंगर वालों में मौत का खतरा 30% तक ज्यादा
शोधकर्ताओं ने जब उन देशों का अध्ययन किया जहां अधिकतर पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी होती हैं। सामने आया कि वो देश कोरोना से सर्वाधिक मौतों के मामले में टॉप 3 में शुमार हैं। यहां अन्य देशों की तुलना में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा 30% तक ज्यादा पाया गया।

कहां-कैसी है रिंग फिंगर
रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन, बुल्गारिया और स्पेन उन 10 देशों में शामिल हैं, जहां अधिकतर पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी होती है। वहीं मलेशिया, सिंगापुर और रूस में पुरुषों की रिंग फिंगर लंबी होती है। छोटी रिंग फिंगर वाले 10 देशों में कोरोना वायरस से लगभग 1 लाख लोगों में से 4.9 (एवरेज) कोविड- 19 से मौत हुई। वहीं लंबी रिंग फिंगर वाले देशों में यह आंकड़ा 2.7 है। यानी मौत का आंकड़ा लगभग 50% तक कम है।

सेक्स हार्मोन पर निर्भर है उंगली का लंबा होना
विशेषज्ञों के अनुसार गर्भ में अगर बच्चे के टेस्टोस्टेरॉन का विकास ज्यादा होता है, तो उसकी रिंग फिंगर लंबी होती है। टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों का सेक्स हार्मोन होता है। यही शरीर में एसीई -2 रिसेप्टर्स की संख्या बढ़ाकर कोविड-19 से लड़ने में मदद करता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन रिसेप्टर्स की संख्या अधिक बढ़ने पर लंग्स के डैमेज होने का खतरा भी होता है।

कैसे चेक करें रिंग फिंगर छोटी है या लम्बी?
सबसे पहले अपनी इंडेक्स फिंगर (तर्जनी उंगली) को लंबाई को मिलीमीटर में नापें। इसके बाद अपनी रिंग फिंगर की लंबाई नापें। इंडेक्स फिंगर की लंबाई से रिंग फिंगर की लंबाई के आंकड़े को घटाएं। आपकी रिंग फिंगर छोटी है या लंबी, यह इंडेक्स फिंगर और रिंग फिंगर की लंबाई के अंतर के आधार पर तय होगा। अगर यह अंतर 0.976 या इससे कम है तो आपकी रिंग फिंगर लंबी है। अगर यह 0.99 या उससे ज्यादा है तो रिंग फिंगर छोटी है।

कोविड-19 के चलते महिलाओं से ज्यादा पुरुषों की हो रही मौत
रिसर्च में शामिल किए गए आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि कोविड-19 से महिलाओं से ज्यादा पुरुषों की मौत हो रही है। हालांकि फिलहाल वैज्ञानिक इसका कारण नहीं खोज पाए हैं। इंग्लैंड और वेल्स का ही उदाहरण लें, तो यहां प्रति 1 लाख लोगों में कोविड-19 से मरने वाले पुरुषों का एवरेज 97.5 है। वहीं महिलाओं का एवरेज 46.5 है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Coronavirus UK Latest Research Updates; Men Longer Ring Fingers Are At Lower Risk Of Death From COVID


https://ift.tt/2Xgt1MK

Comments

Popular Posts

आप शेयर ट्रेडिंग करते हैं तो यह जानना आपके लिए जरूरी है; एक सितंबर से बदल रहा है मार्जिन का नियम

शेयर बाजार में एक सितंबर से आम निवेशकों के लिए नियम बदलने वाले हैं। अब वे ब्रोकर की ओर से मिलने वाली मार्जिन का लाभ नहीं उठा सकेंगे। जितना पैसा वे अपफ्रंट मार्जिन के तौर पर ब्रोकर को देंगे, उतने के ही शेयर खरीद सकेंगे। इसे लेकर कई शेयर ब्रोकर आशंकित है कि वॉल्युम नीचे आ जाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह नया नियम और आपकी ट्रेडिंग को किस तरह प्रभावित करेगा? सबसे पहले, यह मार्जिन क्या है? शेयर मार्केट की भाषा में अपफ्रंट मार्जिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक है। यह वह न्यूनतम राशि या सिक्योरिटी होती है जो ट्रेडिंग शुरू करने से पहले निवेशक स्टॉक ब्रोकर को देता है। वास्तव में यह राशि या सिक्योरिटी, बाजारों की ओर से ब्रोकरेज से अपफ्रंट वसूली जाने वाली राशि का हिस्सा होती है। यह इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग से पहले वसूली जाती है। इसके अलावा स्टॉक्स में किए गए कुल निवेश के आधार पर ब्रोकरेज हाउस भी निवेशक को मार्जिन देते थे। यह मार्जिन ब्रोकरेज हाउस निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी। इसे ऐसे समझिए कि निवेशक ने एक लाख रुपए के स्टॉक्स खरीदे हैं। इस...

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...