Skip to main content

काेराेना वाली सतह छूने से पाॅजिटिव हाेने का कितना जाेखिम, विशेषज्ञ बोले- उन हाथाें से चेहरा, नाक-आंख न छुएं और साबुन से हाथ धाे लें 

संक्रमित सतह काे छूने से काेराेनावायरस हाेने के डर के चलते ही हम पिछले महीनाें से सब्जियां धाे रहे हैं, पैकेट लाकर कुछ समय यूं ही छाेड़ देते हैं और लिफ्ट का बटन दबाते वक्त तनाव में रहते हैं। लेकिन, वायरस वाली सतह या किसी वस्तु से काेविड-19 हाेने का असल खतरा कितना है?

हाल ही में सीडीसी (सेंटर्स फाॅर डिसीज कंट्राेल एंड प्रिवेंशन) ने सतह से संक्रमण फैलने की अपनी चेतावनी काे शिथिल कर दिया था। उसके मुताबिक सतह से संक्रमण फैलने का खतरा नहीं था। इसके तत्काल बाद उसने फिर चेतावनी जारी कर स्पष्ट किया कि संक्रमित सतह से अप्रत्यक्ष संपर्क (फाेमाइट ट्रांसमिशन) से भी काेविड-19 हाेने का खतरा बना रहता है।

'लिफ्ट के बटन या रैलिंग जैसी सतह संक्रमण फैलने के मुख्य वाहक नहीं'

यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के कंपेरेटिव इम्यूनाेलाॅजिस्ट एरिन ब्राेमेज कहते हैं, ‘डाेअरनाॅब्स, लिफ्ट के बटन या रैलिंग जैसी सतह संक्रमण फैलने के मुख्य वाहक नहीं हैं, लेकिन फिर भी अपने चेहरे काे छूना मुश्किल परिस्थिति बना सकता है। यदि काेई संक्रमित अपने हाथ पर खांसता है, फिर आपसेहाथ मिला लेता है और उन्हीं हाथाें से आप अपनी आंखें मल लेते हैं ताे आपसंक्रमित हाे जाएंगे। यदि काेई ग्लास से पानी पी रहा है और आप उस ग्लासकाे पकड़ लें और फिर वही हाथ आंखोंया मुंह पर मल लें ताे आप संक्रमित हाे जाएंगे।’

शाेध बताते हैं कि प्लास्टिक और स्टील पर वायरस 3 दिन रहता है

अप्रत्यक्ष ट्रांसमिशन इसी तरह होता है। शाेध बताते हैं कि प्लास्टिक और स्टील पर वायरस 3 दिन रहता है, लेकिन एक बार सतह पर आने के बाद कुछ घंटाें में विघटित हाेने लगता है। यानी छींक से निकला ड्राॅपलेट कुछ समय तक ताे संक्रमण फैला सकता है, लेकिन कुछ दिनाें बाद तक नहीं। काेलंबिया यूनिवर्सिटी के डाॅ. डैनियल वाइनट्स्की कहते हैं, ‘हाथ धाेना फाेमाइट ट्रांसमिशन ही नहीं, व्यक्ति से व्यक्ति में ट्रांसमिशन के लिए भी जरूरी है।’

हाथ धाेकर संक्रमण की चेन ताेड़ना सबसे बेहतर

सतह के वायरस से संक्रमित हाेने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में वायरस हाथ में आ पाएं और फिर आप आंखों,नाक या मुंह काे छुएं। यह सब सिलसिलेवार हाे गया ताे ही आप बीमार पड़ेंगे। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में इंफेक्शियस डिसीज इपिडेमियाेलाॅजिस्ट जूलिया मार्कस कहती हैं, ‘ग्राॅसरी, मेल, कंटेनर या किसी सतह से संक्रमण के लिए लंबी चेन की जरूरत हाेती है। सबसे बेहतर तरीका है अपने हाथ धाेकर इस चेन काे ताेड़ दें।’



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
शाेध बताते हैं कि प्लास्टिक और स्टील पर वायरस 3 दिन रहता है, लेकिन एक बार सतह पर आने के बाद कुछ घंटाें में विघटित हाेने लगता है।


https://ift.tt/3gBf8jX

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

लॉकडाउन में महिलाओं के खातों में 32% इजाफा, इनमें 70% पहली बार शेयर में इन्वेस्ट कर रहीं

कोरोना संकट के दौरान शेयर बाजार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिलाएं गोल्ड बाॅन्ड से लेकर म्यूचुअल फंड तक में निवेश कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार में निवेश करने वाली महिलाओं में अधिकतर पहली बार निवेश कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में वर्किंग वुमन्स और हाउस वाइफ हैं। ये महिलाएं ना सिर्फ शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं, बल्कि दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं। आइए पढ़ते हैं ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी, जो मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा रही हैं... अंकिता तोलानी - वर्किंग अंकिता तोलानी 28 साल की हैं। दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में जाॅब करती हैं। अंकिता 2016 से शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं। वो SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और गोल्ड बाॅन्ड में निवेश करती हैं। अंकिता कहती हैं,'पहली बार मैंने SIP में 1 लाख रुपए से निवेश शुरू किया था। अब हर साल डेढ़ से दो लाख रुपए निवेश करती हूं।' अंकिता पिछले तीन साल में करीब 10 लाख से ज्यादा निवेश कर चुकी हैं। वहीं, गोल्ड बाॅन्ड में अंकिता अब तक 7 लाख रुपए तक निवेश कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें गोल्ड बाॅन...