Skip to main content

देशभर में मानसून की दस्तक: बारिश के पहले बादलों ने डाला वादियों में डेरा तो कहीं लोगों के लिए मुसीबत लेकर आया

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले मेंमौसम बदला तो यहां का प्राकृतिक सुंदरताभी खिल उठी। बाल्को से लेमरू जाने वाले पहाड़ी रास्ते पर स्थित कॉफी प्वॉइंट पर शुक्रवार की दोपहर का नजारा कुछ अलग ही दिखा। हल्की बारिश के बीच पारा भी गिरकर 32 डिग्री पर पहुंच गया। जिससे मौसम में दो दिन बाद फिर से ठंडक घुल गई।

शहर में छाए मानसून के बादल

फोटो राजस्थान के सीकर की है। शहर में शुक्रवार को सुबह से ही मानसूनी के बादल छा गए। कुछ ही देर बाद फुहारें शुरूहो गईं। मानसून जैसलमेर के रास्ते अजमेर होते हुए 12 दिन पहले सीकर पहुंचा है।

मानसून के आगमन पर इस तरह उड़ते नजर आएपक्षी

फोटो राजस्थान के चूरूकी है। जिले के लोगों के लिए राहत की खबर है। चूरू में दक्षिणी-पश्चिम मानसून ने पिछले साल की तुलना में 11 दिन पहले दस्तक दे दी है। इसके साथ ही जिले में गर्मी का असर भी पांच डिग्री कम हो गया।मानसून के आगमन पर पक्षी इस तरह उड़ते नजर आए।

फोटो मध्य प्रदेश के भोपाल की है। यहां शुक्रवार को दोपहर बाद तेज बारिश हुई। इस दौरान यहां के श्यामला हिल्स इलाके में युवा मस्ती करते नजर आए।

बाढ़ नियंत्रण के लिए3.14 मीटर खाली किया इंदिरा सागर बांध

फोटो मध्य प्रदेश के खंडवा की है। यहां इंदिरा सागर बांध को तेजी से खाली किया जा रहा है,क्योंकि इस साल मानसून ने समय से दस्तक दे दी। इसी के चलते 1 से 25 जून के बीच 24 करोड़ यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन कर 3.14 मीटर तक बांध खाली किया जा चुका है। सबसे ज्यादा बिजली 1 से 10 जून के बीच 14 करोड़ यूनिट बनाई गई।

4 घंटे बारिश के बाद फूट पड़ेझरने

फोटो मध्य प्रदेश के भोपाल की है। प्राकृतिक झरने का यह नजारा शहर की श्यामला हिल्स पहाड़ी का है। शुक्रवार को शहर में 4 घंटे की बारिश के बाद पहाड़ी से 20 फीट ऊंचाई से पानी गिर रहा था।

पहली बारिश ने किया पानी-पानी

फोटो राजस्थान केसीकर की है।ऐसा पहली बार हुआ है, जब मानसून ने तय समय से 13 दिन पहले ही राजस्थान के सभी 13 जिलों को कवर कर लिया है। शुक्रवार को तेज बारिश के बाद सड़कों पर इतना पानी भर गया कि लोगों की बाइक पूरी तरह डूब गई।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Monsoon knocks across the country: Before the rain, the clouds made a camp in the Badis, and then they brought a solution for the people.


https://ift.tt/3i0TC93

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

जिन दुकानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी पूजा सामग्री मिलती थीं, वहां अब पीपीई किट और दस्ताने बिक रहे

निगमबोध घाट पहुंची 32 साल की कुसुम के पिता की मौत आज सुबह ही कोरोना से हुई है। वे दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में बीते पांच दिनों से भर्ती थे। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके पिता के शव को सील करके अपनी ही गाड़ी से निगमबोध घाट पहुंचाया है। अस्पताल के ही दो कर्मचारी पीपीई किट पहने इस शव को घाट तक लेकर आए हैं। कुसुम ने आखिरी वक्त में अपने पिता का चेहरा भी नहीं देखा था, लिहाजा वे निगमबोध घाट के सेवादारों से हाथ जोड़कर और बिलखते हुए प्रार्थना कर रही हैं कि उन्हें एक आखिरी बार अपने पिता का चेहरा देखने की अनुमति दी जाए। निगमबोध घाट के एक सेवादार कुसुम को समझाते हैं कि कोरोना संक्रमित शवों का चेहरा खोलने की अनुमति नहीं है और ऐसा करने से संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। लेकिन, अपने पिता के अंतिम दर्शन की कुसुम की जिद को देखते हुए ये सेवादार इसकी अनुमति दे देते हैं। कुसुम के पिता के शव को वापस उसी गाड़ी में कुछ देर के लिए रखा रखा जाता है, जिसमें अस्पताल से उन्हें यहां लाया गया था। पीपीई किट पहने दो लोग शव का चेहरा कुछ सेकंड के लिए खोलते हैं और जल्द ही शव को दोबारा सील करके चिता पर रख द...