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इसे लाचारी ही कहेंगे, जो हर बार आश्वासन तो दिलाती है, लेकिन बारिश से होने वाली परेशानियों से निजात नहीं दिला पाती

पटना के कांग्रेस मैदान मंदिर के पास एक बुजुर्ग नालेमें गिर गए। यह देखमंदिर के पास चाय बेचने वाले ने शोर मचायाऔरअन्य लोगों की मदद से उन्हें बाहर निकाला। नालेमें गिरने से बुजुर्ग को चलने में परेशानी हो रही थी, ऐसे में उन्हेंखटिया पर लिटाकर बाहर निकालना पड़ा। बुजुर्ग सड़क के किनारे चल रहे थे,लेकिन बारिश की वजह से वहां करीब दो फीट पानी भरा थे, इससे उन्हें सड़क और नाले का पता ही नहीं चला।

बांस के पुल के सहारे लोगों की जिंदगी

नेपाल के तराई वाले इलाकों भारी बारिश से उत्तर बिहार की नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ गया है। भारी बारिश के कारण परमान नदी उफान पर आ गई और देखते ही देखते फारबिसगंज से कुर्साकांटा को जाने वाली सड़क करीब 50 फीट बह गई। अब यहां पर बांस से बने पुल के सहारे ही लोग आ जा सकेंगे।

पता नहीं विकास की गंगा कहां बह रही है

हुक्मरान गरीबों के विकास की योजनाएं बनाते हैं। इसमें शहर और गांवों में भेद नहीं करने की बातें भी होती हैं,लेकिन राज्य सचिवालय से सिर्फ2 किलोमीटर दूर रांची के डोरंडा के हुंडरू गांव के गांववाले आज भी रस्सी पर बने पुल के सहारे आने-जाने के लिए मजबूरहैं। बारिश के दिनों में हवा और फिसलन की वजह से हालात और भीबिगड़ जाते हैं।

विज्ञान की दुनिया में अंधविश्वास हावी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जशपुर में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक युवती सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हद तो तब हो गई जब गांववालोंने उन्हें गोबर के गड्ढे में गड़ादिया।
काफी देर तक जब दोनों की स्थिति नहीं सुधरीतो उन्हें लैलूंगा हॉस्पिटल ले गए।

महंगाई से हाल बेहाल

चंडीगढ़ मेंपेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से बढ़ रही महंगाई के खिलाफ एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के सोशल मीडिया के ऑल इंडिया के चेयरमैन मनोज लुभाना ने कहा- मोदी सरकार महंगाई पर लगाम लगाओ।

पारा 40 डिग्री तो नमी 80 फीसदी

चंडीगढ़ में अभी तक मानसून मेहरबान नहीं हुआ है। ऐसे में रहवासी गर्मी से परेशान हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मॉनसून एक बार एक्टिव तो हुआ था, लेकिन उसके बाद कोई सिस्टम डेवलप न होने की वजह से पिछले चार दिन से बारिश नहीं हुई। इस वजह से पारा 40 डिग्री के नजदीकपहुंच गया। हवा मेंनमी 82 फीसदी होनेसे उमस हो रही है।

गुजरात में 3 लाख से ज्यादा श्रमिकलौटे

कोरोना के भय और भूख से लाॅकडाउन में अपने गांव चले गए श्रमिक नई उम्मीद के साथ सूरत लाैटने लगे हैं। पिछले 27 दिनों में 70 हजार से ज्यादा प्रवासी श्रमिक सूरत लाैट चुके हैं। अनलाॅक-1 में श्रमिकों को कोरोना से ज्यादा रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। कारखाने के मालिक श्रमिकों को फोन करके बुला रहे हैं और ज्यादा वेतन देने का भरोसादे रहेहैं।

ये फोटो इफेक्ट नहीं, टिड्‌डी इफेक्ट है

राजस्थान के सीकर में 35 दिन से खेतों में मंडरा रहा टिड्‌डी दल अब शहर में घुस गया है। रविवार को दूसरी बार टिड्‌डी दल ने शहर में डेरा डाल दिया। लोगों ने घरों की छतों से बर्तन बजाकर झुंड को खदेड़ने की कोशिश की। 6 दिन पहले भी शहर में टिड्‌डी दल घुस गया था। वहीं किसानों ने टिड्‌डी को भगाने के लिए डीजे बजाए थे।

हम सैर के लिएतैयार हैं

राजस्थान के कोटा के गुड़ला एरिया में पहली बार घड़ियालों के लगभग 700 बच्चे अंडों से बाहर निकले। आम तौर पर ऐसा नजारा धौलपुर में ही देखने को मिलता हैं। पिछले साल तक यहां अंडों से लगभग 200 बच्चे ही निकलते थे। बाकी अंडों को कुत्ते और सियार नष्ट कर देते थे। इस बार सेंचुरी के अधिकारियों ने अंडों को बचाने के लिए सवाईमाधोपुर के पाली और कोटा के गुड़ला में आयरन फेंसिंग करवाई।

आज भी किसानों की शान का प्रतीक है बैल

बैलों की जोड़ियां कभी पंजाब की शान होती थीं। 1960 के दशक तक यहां करीब 15 लाख बैलों की जोड़ियों से खेती होती थी। फिर रूस से ट्रैक्टर टेक्नोलॉजी इंपोर्ट हुई। 55 साल बाद 2020 पंजाब की खेती का स्वरूप हीबदल गया है। अब यहां किसान बैलों से खेती नहीं करते। किसी-किसी घर में दो-दो ट्रैक्टर मिल जाएंगे। बैलों की जोड़ियां खेतों की बजाय अब घर की छत पर मूर्तियों के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं।



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It will be called helplessness, which does not relieve the troubles of rain every year.


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