Skip to main content

दुनियाभर में 148 वैक्सीन पर काम चल रहा, इनमें से 17 क्लीनिकल ट्रायल के फेज में; भारत में भी 14 वैक्सीन पर काम

दुनिया के 216 देश इस समय कोरोनावायरस से जूझ रहे हैं। दुनियाभर में इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है। मौतों का आंकड़ा भी 5 लाख के ऊपर आ गया है।

अब बस एक ही सवाल सबके जहन में आता है कि आखिर कब तक हमें कोरोना से लड़ना पड़ेगा? कब तक इसकी कोई असरदार दवा या वैक्सीन आ पाएगी? तो इसका जवाब अभी किसी के पास भी नहीं है।

हालांकि, डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 28 जून तक दुुनियाभर में कोरोना की 148 वैक्सीन पर काम चल रहा है। इनमें से 131 वैक्सीन प्री-क्लीनिकल प्रोसेस में है, जबकि बाकी 17 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के फेज में आ गई हैं।

आमतौर पर किसी भी बीमारी की वैक्सीन बनने में 15 साल से भी ज्यादा का वक्त लगता है। लेकिन, दुनियाभर में कोरोना की वैक्सीन को लेकर जिस तेजी से काम चल रहा है, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस साल के आखिर तक या जून 2021 तक हमारे पास एक अच्छी वैक्सीन होगी।

कुछ दिन पहले ही डब्ल्यूएचओ की चीफ टेड्रोस अधेनॉम गेब्रेसियस ने भी एक साल के अंदर कोरोना की वैक्सीन आ जाने की उम्मीद जताई है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड वैक्सीन तीसरे फेज में
ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और वहां की एक कंपनी एस्ट्राजैनेका (AstraZeneca) एक वैक्सीन पर काम कर रही है। ये वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के तीसरे फेज में पहुंच चुकी है।

वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए एस्ट्राजैनेका ने कई कंपनियों से हाथ मिलाया है। इसमें भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी है। इन कंपनियों की मदद से कंपनी जून 2021 तक 200 करोड़ वैक्सीन बनाना चाहती है।

भारत में भी 14 वैक्सीन पर काम चल रहा
इस महीने की शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने बताया था कि भारत में कोरोना की 14 वैक्सीन पर काम चल रहा है। इनमें से 4 वैक्सीन का काम अगले 3 से 5 महीनों में क्लीनिकल ट्रायल के फेज में पहुंचने की उम्मीद है।

इन सबके अलावा दुनियाभर में जिन 148 वैक्सीन पर काम चल रहा है, उसमें 5 या तो भारतीय कंपनियों की है या फिर भारतीय कंपनियां हिस्सेदार हैं। गुजरात की जायडस कैडिला कंपनी भी है। इसी कंपनी ने 2010 में देश में स्वाइन फ्लू की सबसे पहली वैक्सीन तैयार की थी।

इसके अलावा भारत बायोटेक दो, इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स लिमिटेड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया 1-1 वैक्सीन पर दूसरे देशों की संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

वैक्सीन के लिए कितना खर्चा?
कोरोना महामारी से निपटने के लिए दुनियाभर की सरकारें करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं। भारत में भी पीएम केयर्स फंड से 100 करोड़ रुपए वैक्सीन पर खर्च हो रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कोरोना से संक्रमित होने का खतरा सभी को है, इसलिए इसके इलाज और रोकथाम के उपाय भी सभी के लिए होने चाहिए।

इसी हफ्ते यूएन ने भी कहा है कि कोरोना के असरदार इलाज और वैक्सीन के लिए अगले 12 महीनों में 31 अरब डॉलर (करीब 2.35 लाख करोड़ रुपए) की जरूरत होगी।

अप्रैल में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने भी अनुमान लगाया था कि अगर हम कोरोना की कोई कारगर वैक्सीन बना भी लेते हैं, तो हमें इसकी मैनुफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए 25 अरब डॉलर (करीब 1.90 लाख करोड़ रुपए) की जरूरत होगी।

बिल गेट्स ने भी एक ब्लॉग के जरिए कहा था कि अगर हम कोरोना की कारगर वैक्सीन बनाने में कामयाब होते हैं, तो इससे हम लाखों करोड़ रुपए बचाने में भी कामयाब होंगे।

ये तस्वीर पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की लैब है, जहां एक वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन पर काम कर रहा है। ये दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने की कंपनी है।

किस देश को सबसे पहले मिलेगी कोरोना की वैक्सीन?
अगर कोरोना की कोई वैक्सीन बन जाती है, तो ये सबसे पहले किसे मिलेगी? तो इसका जवाब तो यही है कि जो देश पहले इस वैक्सीन को बनाएगा, वहीं के लोगों को सबसे पहले वैक्सीन मिलेगी।

पिछले हफ्ते अमेरिका के टॉप इन्फेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट डॉ. एंथनी फाउची ने कहा है कि उन्हें इस साल के आखिर तक या 2021 की शुरुआत में कोरोना की एक वैक्सीन मिलने की उम्मीद है।

अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और चीन भी वैक्सीन पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं। ब्रिटेन की एस्ट्राजैनेका ने वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से पार्टनरशिप की है। अगर एस्ट्राजैनेका वैक्सीन बना लेती है, तो सीरम इंस्टीट्यूट भारत में भी 1 अरब डोज तैयार कर लेगी।

तब भी सबसे बड़ा सवाल, क्या कोरोना की वैक्सीन आ पाएगी?
कोरोनावायरस से बचने के लिए वैक्सीन का काम भले ही तेजी से चल रहा हो और दुनियाभर में वैक्सीन के आने पर उम्मीदें जताई जा रही हों। लेकिन, फिर भी एक सवाल यही है कि क्या कोरोना की वैक्सीन बन पाएगी?

ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोनावायरस भी एक तरह का फ्लू है। फ्लू की बीमारी करीब सैकड़ों साल पुरानी है, लेकिन आज तक फ्लू की कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है। यही कारण है कि हर साल सर्दी-जुकाम की बीमारियां फैलती हैं।

इसके अलावा इसका दूसरा कारण ये भी है कि कुछ खतरनाक बीमारियों की वैक्सीन अभी तक नहीं बन सकी।

1981 में एचआईवी वायरस फैला। इस वायरस की वजह से इंसानों में एड्स की बीमारी फैलती है। 4 दशक बीत जाने के बाद भी इस बीमारी की कोई असरदार दवा या वैक्सीन नहीं बन सकी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इससे अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

इसके बाद 2002-03 में चीन से ही सार्स फैला। दुनियाभर में इसके करीब साढ़े 8 हजार मामले सामने आए थे, जबकि 750 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। हालांकि, जल्द ही इस बीमारी पर काबू पा लिया गया था, लेकिन कोई वैक्सीन नहीं बनाई जा सकी।

2015 में मर्स वायरस फैला था। इससे अब तक ढाई हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं और 850 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अभी भी मर्स वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कुछ देशों में इसके मामले अभी भी आते रहते हैं। लेकिन, इसकी भी कोई वैक्सीन अभी तक तैयार नहीं हो सकी है।

कुछ वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि सार्स और मर्स जैसे वायरस फैलने के बाद अगर इन बीमारियों से निपटने के लिए वैक्सीन पर काम जारी रहता तो कोरोना की वैक्सीन बनाने में ज्यादा कठिनाई नहीं आती। क्योंकि, सार्स और मर्स भी कोरोनावायरस ही है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
ये तस्वीर रूस के सेंट पीटर्सबर्ग की है। यहां की बायोकैड बायोटेक्नोलॉजी कंपनी में भी कोरोना की वैक्सीन पर काम चल रहा है।


https://ift.tt/3eK0FB1

Comments

Popular Posts

राम मंदिर की नींव पूजा के लिए 5 अगस्त को पीएम मोदी के पास सिर्फ 32 सेकंड होंगे, ये अभिजीत मुहूर्त उत्तर-दक्षिण का संगम

(विजय उपाध्याय) श्रीरामजन्म भूमि मंदिर के नींव पूजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास 5 अगस्त को सिर्फ 32 सेकंड होंगे। इस अभिजीत मुहूर्त में 500 साल की कोशिशों को साकार करने की शुरुआत होगी। अभिजीत मुहूर्त में ही श्रीराम का जन्म हुआ था। यह शुभ मुहूर्त ज्योतिष शास्त्र में उत्तर-दक्षिण के संगम से निकला है। उत्तर भारत में 5 अगस्त को भाद्रपद और दक्षिण भारत में श्रावण मास है। मुहूर्त का समय 5 अगस्त को मध्याह्न 12 बजकर 15 मिनट के आसपास है। इस मुहूर्त को काशी के प्रकांड विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्रविड ने निकाला है। अभिजीत मुहूर्त में नींव पूजन सुनिश्चित करने के लिए काशी विद्वत परिषद के मंत्री प्रो. राम नारायण द्विवेदी के साथ तीन आचार्य निगाह रखेंगे। शुरुआत महा-गणेश पूजन से होगी देश के अलग-अलग राज्यों से आए वैदिक आचार्य 3 अगस्त से नींव पूजन शुरू करेंगे। शुरुआत महा-गणेश पूजन से होगी। नींव पूजन में चुनिंदा लोगों को ही आमंत्रित किया जा रहा है। इनमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व मंत्री मुरलीमनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती समेत सभी राज्यों के सीएम शामिल हैं। 4 अगस्त को ...

लड़की के घरवालों को लड़का पसंद नहीं था, शादी रुकवाने के लिए कोर्ट पहुंचकर बोले- लड़की को कोरोना है, 14 दिन के लिए क्वारैंटाइन हुई

(सदाकत पठान) खंडवा की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बुधवार को युवक-युवती लव मैरिज के लिए शपथ पत्र बनवाने पहुंचे। युवती वकील से बात कर रही थी। तभी उसके परिजन आ गए और बोले- ‘वकील साहब! आप इस लड़की से दूर रहिए, इसे कोरोना है।’ इतना ही नहीं परिजन ने स्वास्थ्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर 104 पर भी शिकायत कर दी कि कोरोना पॉजिटिव युवती कोर्ट में शादी के लिए शपथ पत्र बनवा रही है। कोरोना का नाम सुनते ही टाइपिस्ट और वकीलों में हड़कंप मच गया। युवती का शपथ पत्र बनवा रहे वकील वीरेंद्र वर्मा ने भी उससे दूरी बना ली। फिर हाथ जोड़कर कहा- ‘आप पहले कोरोना की जांच करवा लीजिए। रिपोर्ट निगेटिव आने पर आपकी मदद करेंगे, क्योंकि इस स्थिति में कोई भी वकील आपका केस नहीं लेगा।’ इसी दाैरान, स्वास्थ्य विभाग की टीम भी कोर्ट पहुंची और युवती को जिला अस्पताल ले गई। जांच के लिए सैंपल लेकर लड़की काे 14 दिन के लिए हाेम क्वारैंटाइन कर दिया। दरअसल, अमलपुरा इलाके की 19 वर्षीय युवती का अपने ही समाज के एक युवक (22) से प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवक के परिजन को लड़की पसंद थी। जबकि युवती के परिजन को लड़का पसंद नहीं था। युवती को उसके परिजन ने...

पूरे देश में सिर्फ 600 की आबादी बची है, पर लोग हिंदुस्तान नहीं आना चाहते, कहते हैं- यहां बम और भारत में गरीबी मार देगी

मुजीब मशाल/फहीम आबिद. अफगानिस्तान में हिंसा का शिकार हो रहे हिंदू और सिखों की मदद के लिए भारत सरकार कवायद तेज कर रही है। सरकार ने कहा है कि अफगान युद्ध के दौरान वहां हमलों का शिकार हुए हिंदु और सिख समुदाय के वीजा और लॉन्ग टर्म रेसिडेंसी के लिए प्रयास कर रहे हैं। कई लोगों ने इस फैसले पर खुशी जताई है, लेकिन उनका कहना है कि भारत में वापसी का मतलब है गरीबी में रहना। वापसी पर अफगान हिंदू-सिख लॉन्ग टर्म रेसिडेंसी के लिए आवेदन कर सकते हैं शनिवार को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि "भारत ने हमलों का शिकार हो रहे अफगान हिंदु और सिख समुदाय की भारत वापसी को सुविधाजनक बनाने का फैसला लिया है।" काबुल में भारतीय अधिकारी ने कहा कि इस फैसले का मतलब है अफगानिस्तान के हिंदू-सिखों को भारत में वीजा के लिए प्राथमिकता और लॉन्ग टर्म रेसिडेंसी के लिए आवेदन करने की सुविधा मिलेगी। यहां हमले में मर सकते हैं, लेकिन भारत में गरीबी से मर जाएंगे अफगानिस्तान में रह रहे हिंदू-सिखों के वहां पर कई पीढ़ियों से दुकानें और व्यापार हैं। वे अपने दिन अगले हमले की आशंका में बिता रहे हैं। लोगों...