Skip to main content

पूर्वी राजस्थान में बारिश से पहले उठा धूल का गुबार, मुजफ्फरपुर में पहली बारिश में ही अस्पताल में भरा पानी

राजस्थान में तय समय से एक दिन पहले 48 घंटे में मानसून जयपुर समेत 27 जिलाें तक पहुंच गया। अब पश्चिमी राजस्थान के 4 जिलाें बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और पूर्वी राजस्थान के 2 जिलाें झुंझुनूं और सीकर में मानसून की दस्तक बाकी है। इस बीच, गुरुवार काे चूरू और जैसलमेर में उठे धूल के गुबार काे देखकर ऐसा लगा मानाे मानसून काे देखकर आंधी भाग रही है। धूल के इस तरह के गुबार अब देखने काे नहीं मिलेंगे, क्याेंकि बारिश में ऐसा नजारे नहीं बन सकते।

पहली ही बारिश से अस्पतालमें भरा पानी

फोटो बिहार के मुजफ्फरपुर की है। यहां बुधवार रात से जारी बारिश से शहर के सदर अस्पतालके मेटरनिटी वार्ड में पानी भर गया,जिसके बाद यहां भर्ती गर्भवती महिलाओं को वेटिंग रूप में रखा गया।

पहली ही बारिश से झरने में आया पानी

फोटो राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की है। जिले में मानसून ने बुधवार को दस्तक दे दी। गुरुवार को भी दिनभर बादल छाए रहे। पहली ही बारिश के बाद मेनाल के प्रसिद्ध झरने में बहाव देखा जा सकता है।

ओंकारेश्वर मेंहरियाली की चादर

फोटो मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर की है।बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल ओंकारेश्वरतीर्थ में नर्मदा-कावेरी संगम स्थल रमणीय स्थलों में से एक है, पहली बारिश के बाद हरियाली की चादर से यहां के प्राकृतिक सौंदर्य में और निखार आ गया।

मिट्‌टी के बर्तन बनाने को मजबूरराष्ट्रीय तीरंदाज

फोटो झारखंड के जमशेदपुर की है। ये हैं राष्ट्रीय तीरंदाज शिवकुमार कुंभकार। सरायकेला-खरसावां के कुम्हरासाई के शिवकुमार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि तीरंदाजी जारी रख सकें। पैतृक व्यवसाय मिट्टी के बर्तन बनाने का है। पिता भीमसेनकाफी कमजोर हो चुके हैं। घर में आमदनी का और कोई रास्ता नहीं है। शिव ने कहा कि रिवॉर्ड के पैसे से धनुष खरीदा था, कुछ पैसे घर में भी दिए। अब सहयोग नहीं मिला तो तीरंदाजी को छोड़ना ही पड़ेगा।

मर्सिडीज को बैलगाड़ी से खींचकर किया विरोध प्रदर्शन

फोटो देश की राजधानी दिल्ली की है। यहां डीजल की बढ़ी कीमतों को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने सचिवालय पर प्रदर्शन किया तो न्यू मोती नगर में लोगों ने लक्जरी कार मर्सिडीज को बैलगाड़ी से खींचकर सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Dust gusts before rains in eastern Rajasthan, water filled in hospital in first rains in Muzaffarpur


https://ift.tt/382SuNr

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

जिन दुकानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी पूजा सामग्री मिलती थीं, वहां अब पीपीई किट और दस्ताने बिक रहे

निगमबोध घाट पहुंची 32 साल की कुसुम के पिता की मौत आज सुबह ही कोरोना से हुई है। वे दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में बीते पांच दिनों से भर्ती थे। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके पिता के शव को सील करके अपनी ही गाड़ी से निगमबोध घाट पहुंचाया है। अस्पताल के ही दो कर्मचारी पीपीई किट पहने इस शव को घाट तक लेकर आए हैं। कुसुम ने आखिरी वक्त में अपने पिता का चेहरा भी नहीं देखा था, लिहाजा वे निगमबोध घाट के सेवादारों से हाथ जोड़कर और बिलखते हुए प्रार्थना कर रही हैं कि उन्हें एक आखिरी बार अपने पिता का चेहरा देखने की अनुमति दी जाए। निगमबोध घाट के एक सेवादार कुसुम को समझाते हैं कि कोरोना संक्रमित शवों का चेहरा खोलने की अनुमति नहीं है और ऐसा करने से संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। लेकिन, अपने पिता के अंतिम दर्शन की कुसुम की जिद को देखते हुए ये सेवादार इसकी अनुमति दे देते हैं। कुसुम के पिता के शव को वापस उसी गाड़ी में कुछ देर के लिए रखा रखा जाता है, जिसमें अस्पताल से उन्हें यहां लाया गया था। पीपीई किट पहने दो लोग शव का चेहरा कुछ सेकंड के लिए खोलते हैं और जल्द ही शव को दोबारा सील करके चिता पर रख द...