Skip to main content

विदेशी जमीन पर लगातार दूसरे क्लीन स्वीप से बचने उतरेगी टीम इंडिया, बॉलर्स का फॉर्म में आना जरूरी

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला बुधवार को कैनबरा में खेला जाएगा। मनुका ओवल मैदान पर जब भारत मैदान पर उतरेगा, तब उसके सामने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपनी पहली जीत दर्ज करने की चुनौती होगी। इसके साथ ही टीम विदेशी जमीन पर लगातार दूसरे क्लीन स्वीप से बचना चाहेगी। इससे पहले जनवरी-फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे पर भारत को कीवी टीम ने 3-0 से हराया था।

कैनबरा के मैदान की बात करें, तो ऑस्ट्रेलिया ने यहां खेले अपने चारों मुकाबले जीते हैं। वहीं, भारत ने इस मैदान पर अब तक कुल 2 मुकाबले खेले हैं और दोनों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। इस सीरीज में भारतीय बॉलर्स स्ट्रगल करते नजर आए हैं। ऐसे में अगर भारत को जीत दर्ज करनी है, तो बॉलर्स को लय में आना होगा।

सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों का बोलबाला
सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पूरी तरह से भारतीय बॉलर्स पर हावी रहे हैं। स्टीव स्मिथ ने पिछले दोनों वनडे में शतक जड़ा। वहीं, कप्तान एरॉन फिंच ने पहले वनडे में शतक और दूसरे मुकाबले में फिफ्टी लगाई। चोट की वजह से सीरीज से बाहर होने वाले डेविड वॉर्नर ने भी दोनों मुकाबलों में फिफ्टी लगाई। स्मिथ-फिंच के अलावा मार्नस लाबुशाने और ग्लेन मैक्सवेल भी अच्छी फॉर्म में हैं।

भारतीय बल्लेबाजों की बात करें, तो उन्हें शुरुआत तो मिली, लेकिन वे उसे बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके। शिखर धवन और हार्दिक पंड्या ने पहले वनडे में फिफ्टी लगाई, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। इसके बाद दूसरे वनडे में कप्तान विराट कोहली और उप-कप्तान लोकेश राहुल ने फिफ्टी लगाई, लेकिन बड़ा स्कोर नहीं बना सके। ऐसे में तीसरे वनडे में भारतीय बल्लेबाजों को बड़ा स्कोर बनाकर टीम को जीत दिलानी होगी।

भारतीय गेंदबाज लय में नहीं दिखे
टीम की गेंदबाजी भारत की हार का सबसे बड़ी वजह रही है। भारतीय बॉलर्स शुरुआती ओवर में विकेट नहीं ले पा रहे हैं। यही नहीं, भारतीय बॉलर्स को जमकर रन पड़ रहे हैं। मोहम्मद शमी-जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज गेंदबाज भी रन रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। ऐसे में अगर टीम को जीतना है, तो बॉलर्स को जिम्मेदारी लेनी होगी और कंगारू टीम के विकेट निकालने होंगे।

वॉर्नर-कमिंस की गैर-मौजूदगी भारत के लिए मौका
चोट की वजह से वॉर्नर टीम का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, पैट कमिंस को टेस्ट सीरीज की तैयारी के मद्देनजर आराम दिया गया है। ऐसे में इन दोनों दिग्गजों के न होने से भारत के पास अच्छा मौका होगा। भारतीय बॉलर्स पिछले 5 मुकाबले से पावर-प्ले के दौरान चले आ रहे विकेटों के सूखे को दूर कर सकते हैं और भारतीय बल्लेबाज कमिंस की गैर-मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया पर अटैक कर सकते हैं।

कोहली के पास एक और रिकॉर्ड बनाने का मौका
भले ही भारत यह सीरीज हार चुका है, लेकिन तीसरे वनडे में कोहली के पास एक और रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा। कोहली अगर इस मैच शतक जड़ने में कामयाब हो जाते हैं, तो वे बतौर कप्तान सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। अभी कोहली और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम 41-41 शतक दर्ज हैं।

ऑस्ट्रेलिया से 7वीं सीरीज हारा भारत
शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर ऑस्ट्रेलिया पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुका है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस सीरीज को मिलाकर कुल 13 वनडे सीरीज खेली गईं हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया ने 7 और भारत ने 6 सीरीज अपने नाम कीं हैं। ऑस्ट्रेलिया ने घर में भारत के खिलाफ 3 द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेलीं, जिसमें दो जीती और एक हारी है।

मौसम और पिच रिपोर्ट
कैनबरा में सामान्य रूप से आसमान साफ रहेगा। बीच-बीच में बादल छा सकते हैं। अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। पिच से बल्लेबाजों को मदद मिल सकती है। यहां खेले गए पिछले 9 वनडे मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का सक्सेस रेट 77.77% है।

हेड-टू-हेड
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक 142 वनडे खेले गए। इसमें टीम इंडिया ने 52 मैच जीते और 80 हारे हैं, जबकि 10 मुकाबले बेनतीजा रहे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी के घर में भारतीय टीम ने 53 वनडे खेले, जिसमें से 13 जीते और 38 मैच हारे हैं। 2 वनडे बेनतीजा रहे।

भारतीय वनडे टीम

  • बैट्समैन: विराट कोहली (कप्तान), शुभमन गिल, शिखर धवन, लोकेश राहुल (उपकप्तान, विकेटकीपर), मनीष पांडे, श्रेयस अय्यर, मयंक अग्रवाल और संजू सैमसन (विकेटकीपर)।
  • ऑलराउंडर: हार्दिक पंड्या और रविंद्र जडेजा।
  • बॉलर्स: युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, नवदीप सैनी, शार्दूल ठाकुर और टी नटराजन।

ऑस्ट्रेलिया वनडे टीम

  • बैट्समैन: एरॉन फिंच (कप्तान), एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), स्टीव स्मिथ, डी'आर्की शॉर्ट, मैथ्यू वेड (विकेटकीपर)।
  • ऑलराउंडर: मार्नस लाबुशाने, मोइसेस हेनरिक, ग्लेन मैक्सवेल, डेनियल सैम्स, मार्कस स्टोइनिस और कैमरॉन ग्रीन।
  • बॉलर्स: पैट कमिंस, सीन एबॉट, एश्टन एगर, जोश हेजलवुड, मिचेल स्टार्क, एंड्र्यू टाई और एडम जम्पा।

भारत ने पिछली सीरीज में 2-1 से ऑस्ट्रेलिया को हराया था
पिछली बार भारतीय टीम ने जनवरी 2019 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 3 वनडे की सीरीज खेली थी। पहला वनडे हारने के बाद टीम इंडिया ने यह सीरीज 2-1 से जीती थी। तब भी भारतीय टीम की कमान विराट कोहली के हाथ में ही थी। ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी एरॉन फिंच के ही पास थी।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
India vs Australia 3rd ODI Oval Update Virat Kohli Steve Smith | Head To Head Match Stats, Winning and Pitch Prediction & Weather Analysis


https://ift.tt/37hAP4I

Comments

Popular Posts

आप शेयर ट्रेडिंग करते हैं तो यह जानना आपके लिए जरूरी है; एक सितंबर से बदल रहा है मार्जिन का नियम

शेयर बाजार में एक सितंबर से आम निवेशकों के लिए नियम बदलने वाले हैं। अब वे ब्रोकर की ओर से मिलने वाली मार्जिन का लाभ नहीं उठा सकेंगे। जितना पैसा वे अपफ्रंट मार्जिन के तौर पर ब्रोकर को देंगे, उतने के ही शेयर खरीद सकेंगे। इसे लेकर कई शेयर ब्रोकर आशंकित है कि वॉल्युम नीचे आ जाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह नया नियम और आपकी ट्रेडिंग को किस तरह प्रभावित करेगा? सबसे पहले, यह मार्जिन क्या है? शेयर मार्केट की भाषा में अपफ्रंट मार्जिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक है। यह वह न्यूनतम राशि या सिक्योरिटी होती है जो ट्रेडिंग शुरू करने से पहले निवेशक स्टॉक ब्रोकर को देता है। वास्तव में यह राशि या सिक्योरिटी, बाजारों की ओर से ब्रोकरेज से अपफ्रंट वसूली जाने वाली राशि का हिस्सा होती है। यह इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग से पहले वसूली जाती है। इसके अलावा स्टॉक्स में किए गए कुल निवेश के आधार पर ब्रोकरेज हाउस भी निवेशक को मार्जिन देते थे। यह मार्जिन ब्रोकरेज हाउस निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी। इसे ऐसे समझिए कि निवेशक ने एक लाख रुपए के स्टॉक्स खरीदे हैं। इस...

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...