Skip to main content

राजस्थान के माउंटआबू में पारा 1 डिग्री, हिमाचल के शिमला में समय से पहले बर्फबारी

माउंट आबू. पिछले कुछ दिनाें से चल रही शीतलहर ने माउंट के माैसम काे बदल दिया है। यहां पिछले 2 दिनाें से लगातार तापमान 1 डिग्री पर स्थिर है। इतना ही नहीं, अभी तक इस महीने 10 दिनाें में 8 बार तापमान जमाव बिंदु के करीब जा चुका है।

ऐसे में ओस की बूंदें बर्फ बन रही हैं। वहीं माउंट में पिछले 10 सालाें से माैसम का ट्रेंड बदला है। 10 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब नवंबर के महीने में तापमान 1 डिग्री तक पहुंचा है और पारा जमाव बिंदु तक पहुंचने के साथ बर्फ भी जमी। दरअसल, माउंट आबू में माैसम का यह ट्रेंड रहता है कि दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह से तापमान 1 या 2 डिग्री और माइनस तक पहुंच जाता है।

लेकिन इस बार नवंबर महीने में ऐसा हुआ है कि पिछले 6 दिनाें से माउंट में लगातार न्यूनतम तापमान 1 डिग्री पर रहा है। यही नहीं, इस महीने में कम से कम 8 दिन बर्फ भी जमी है। रविवार काे भी यहां का तापमान 1 डिग्री दर्ज किया गया।

समय से पहले बर्फबारी लेकिन कोरोना के चलते हाेटलाें में 20% तक ही ऑक्यूपेंसी

फोटो राजस्थान के माउंट आबू की है। यहां पारा 1 डिग्री पर पहुंच गया है।

शिमला. प्रदेश में इस बार समय से पहले बर्फबारी हुई थी, पर काेविड-19 के कारण पर्यटन काराेबार काे गहरा धक्का लगा। 16 नवंबर काे जिला शिमला सहित प्रदेश के ऊपरी क्षेत्राें में अच्छी बर्फबारी हुई, इसके बावजूद काेराेना संक्रमण के बढ़ते कहर के चलते प्रदेश के हाेटलाें में 20% तक ही ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई है।

सितंबर से हिमाचल पर्यटकाें के लिए खाेल दिया गया है, इसके बावजूद प्रदेश में पर्यटकाें की आमद पिछले साल के मुकाबले बहुत कम है। अकेले शिमला में तीन महीनाें में 80 हजार पर्यटक घूमने आए हैं, यहां पर 518 हाेटल हैं इनमें 3 माह में 20% तक की ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई।

बिहार में पहाड़ों पर बर्फबारी और तेज हवा से दिसंबर में कड़ाके की सर्दी

फोटो राजस्थान के चित्तौडगढ़ की है। यहां सुबह ओस के कारण पौधे जम गए।

पटना. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के सभी हिस्सों में मौसम शुष्क है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम की दिशा आने वाली 11 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ठंडी हवाएं और पहाड़ों पर लगातार होने वाली बर्फबारी से आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट होगी। इससे रात और दिन के तापमान में अंतर कम होने से दिसंबर के पहले सप्ताह में ठंड के साथ ही गलन बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक पहाड़ों पर लगातार होने वाली बर्फबारी की वजह से पश्चिमी हिमालय से बहने वाली ठंडी हवाओं के कारण आने वाले चार दिनों में पारे में गिरावट होने की संभावना है।

बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बन चुका है, जिसका अगले 36 घंटे में डीप डिप्रेशन में बदलने की आशंका है। 24 घंटे में यह और भी ताकतवर हो सकता है। इससे झारखंड, पश्चिम बंगाल के साथ दक्षिण भारत में हल्की और मध्य दर्जे की बारिश होगी। रविवार को पटना का न्यूनतम 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
10 साल में पहली बार नवंबर के महीने में माउंट आबू में तापमान 1 डिग्री पर रहा। ऐसे में गुलाब की पत्तियों और फूल पर बर्फ जम गई। (फाेटाे: निधि उमठ)


https://ift.tt/2Vd1IRP

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

जिन दुकानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी पूजा सामग्री मिलती थीं, वहां अब पीपीई किट और दस्ताने बिक रहे

निगमबोध घाट पहुंची 32 साल की कुसुम के पिता की मौत आज सुबह ही कोरोना से हुई है। वे दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में बीते पांच दिनों से भर्ती थे। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके पिता के शव को सील करके अपनी ही गाड़ी से निगमबोध घाट पहुंचाया है। अस्पताल के ही दो कर्मचारी पीपीई किट पहने इस शव को घाट तक लेकर आए हैं। कुसुम ने आखिरी वक्त में अपने पिता का चेहरा भी नहीं देखा था, लिहाजा वे निगमबोध घाट के सेवादारों से हाथ जोड़कर और बिलखते हुए प्रार्थना कर रही हैं कि उन्हें एक आखिरी बार अपने पिता का चेहरा देखने की अनुमति दी जाए। निगमबोध घाट के एक सेवादार कुसुम को समझाते हैं कि कोरोना संक्रमित शवों का चेहरा खोलने की अनुमति नहीं है और ऐसा करने से संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। लेकिन, अपने पिता के अंतिम दर्शन की कुसुम की जिद को देखते हुए ये सेवादार इसकी अनुमति दे देते हैं। कुसुम के पिता के शव को वापस उसी गाड़ी में कुछ देर के लिए रखा रखा जाता है, जिसमें अस्पताल से उन्हें यहां लाया गया था। पीपीई किट पहने दो लोग शव का चेहरा कुछ सेकंड के लिए खोलते हैं और जल्द ही शव को दोबारा सील करके चिता पर रख द...

लॉकडाउन में महिलाओं के खातों में 32% इजाफा, इनमें 70% पहली बार शेयर में इन्वेस्ट कर रहीं

कोरोना संकट के दौरान शेयर बाजार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिलाएं गोल्ड बाॅन्ड से लेकर म्यूचुअल फंड तक में निवेश कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार में निवेश करने वाली महिलाओं में अधिकतर पहली बार निवेश कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में वर्किंग वुमन्स और हाउस वाइफ हैं। ये महिलाएं ना सिर्फ शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं, बल्कि दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं। आइए पढ़ते हैं ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी, जो मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा रही हैं... अंकिता तोलानी - वर्किंग अंकिता तोलानी 28 साल की हैं। दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में जाॅब करती हैं। अंकिता 2016 से शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं। वो SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और गोल्ड बाॅन्ड में निवेश करती हैं। अंकिता कहती हैं,'पहली बार मैंने SIP में 1 लाख रुपए से निवेश शुरू किया था। अब हर साल डेढ़ से दो लाख रुपए निवेश करती हूं।' अंकिता पिछले तीन साल में करीब 10 लाख से ज्यादा निवेश कर चुकी हैं। वहीं, गोल्ड बाॅन्ड में अंकिता अब तक 7 लाख रुपए तक निवेश कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें गोल्ड बाॅन...