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मोदी ने कहा- एक खुशखबरी देना चाहता हूं, मां अन्न पूर्णा की प्रतिमा कनाडा से भारत आ रही है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात की। उन्होंने कहा कि देश के लाेगों को एक खुशखबरी देना चाहता हूं। मां अन्न पूर्णा की प्रतिमा कनाडा से भारत आ रही है। यह 100 साल पहले 1913 में वाराणसी से चुराकर भेजी गई थी। मैं कनाडा सरकार का आभार व्यक्त करता हूं। मां अन्न पूर्णा का काशी से गहरा संबंध। प्रतिमा का वापस आना हमारे लिए सुखद। ऐसा करने वाले गिरोह पर सख्ती लगाई जा रही है। भारत प्रतिमाएं वापस लाने का प्रयास कर रहा है।

लोगों से मांगे थे सुझाव

मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि हर बार मन की बात में हम उन लोगों की कामयाबी का जश्न मनाते हैं, जो समाज के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। कई ऐसे उदाहरण वक्त की कमी के कारण साझा नहीं हो पाते। मैं बहुत से सुझाव पढ़ता हूं और वे वाकई बहुत कीमती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस महीने मन की बात कार्यक्रम 29 तारीख को है। मुझे पहले से जीवन यात्रा को प्रेरित करने वाली कई दिलचस्प जानकारियां मिली हैं। आप NaMo App, MyGov पर अपने विचार साझा करते रहें या 1800-11-7800 पर अपना संदेश रिकॉर्ड करें। मन की बात पीएम का रेडियो प्रोग्राम है। यह हर महीने के आखिरी रविवार को ब्रॉडकास्ट किया जाता है।



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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात रेडियो प्रोग्राम का यह 71वां संस्करण है।


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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...