Skip to main content

दुनिया में सबसे ज्यादा गांजा फूंकने के मामले में दिल्लीवाले तीसरे और मुंबईवाले 6वें नंबर पर

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ा ड्रग एंगल बढ़ता ही जा रहा है। शनिवार को ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिंबाचिया को गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि, सोमवार को दोनों को जमानत भी मिल गई। भारती और उनके पति के पास से NCB को 86.5 ग्राम गांजा मिला था। दोनों ने ड्रग्स लेने की बात भी कबूली थी।

गांजा फूंकने में दिल्ली और मुंबई दुनिया में टॉप-10 में

जर्मनी की मार्केट रिसर्च फर्म ABCD ने दुनिया के 120 देशों के 2018 के आंकड़ों के आधार पर एक लिस्ट बनाई थी। इस लिस्ट में बताया था कि दुनिया के किस शहर में सबसे ज्यादा गांजा फूंका जाता है। ABCD के मुताबिक, दुनियाभर में सबसे ज्यादा गांजा न्यूयॉर्क में फूंका जाता है। यहां के लोग हर साल 70 हजार 252 किलो गांजा फूंक जाते हैं। दूसरे नंबर पर पाकिस्तान का कराची शहर है, जहां सालभर में 38 हजार 56 किलो गांजे की खपत होती है।

दुनिया में सबसे ज्यादा गांजा फूंकने वाले टॉप-10 शहरों में दिल्ली और मुंबई भी आते हैं। दिल्लीवाले हर साल 34 हजार 708 किलो और मुंबईवाले 29 हजार 374 किलो गांजा फूंकते हैं।

5 साल में NCB ने 14.74 लाख किलो गांजा पकड़ा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB का आंकड़ा बताता है कि 2019 में 3.42 लाख किलो से ज्यादा गांजा पकड़ा है। इसमें 35 हजार 310 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई, जिसमें 35 हजार 26 पुरुष और 284 महिलाएं थीं।

वहीं, पिछले 5 साल की बात करें तो 2015 से लेकर 2019 के बीच NCB ने 14.74 लाख किलो गांजा पकड़ा। इसमें सबसे ज्यादा 3.91 लाख किलो गांजा 2018 में पकड़ा गया था।

ड्रग्स भी दो तरह के होते हैं। एक होते हैं नारकोटिक यानी नींद लाने वाले ड्रग्स। जैसे- चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन, कोकिन, मॉर्फिन वगैरह। दूसरे होते हैं साइकोट्रोपिक यानी दिमाग पर असर डालने वाले ड्रग्स। जैसे- LSD, MDMA, अल्प्राजोलम, कैटामाइन जैसे ड्रग्स।

ड्रग्स की वजह से हर दिन देश में 23 लोग जान गंवा रहे

ड्रग्स की लत अगर एक बार लग जाए, तो उसे पीछा छुड़ा पाना बहुत मुश्किल होता है। अगर ये मिलता है तो भी जान जाने का खतरा है और नहीं मिलता तो भी। NCRB का डेटा बताता है कि देश में हर दिन ड्रग्स की वजह से 23 लोगों की जान जाती है। पिछले साल 7 हजार 860 लोगों ने ड्रग्स की वजह से सुसाइड कर लिया। इसके अलावा 704 लोग ड्रग के ओवरडोज की वजह से मारे गए। यानी, 2019 में 8 हजार 564 लोगों की जान ड्रग्स ने ले ली। इस हिसाब से हर दिन 23 लोग ड्रग्स की वजह से जान गंवा रहे हैं।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Maharashtra Madhya Pradesh: Bharti Singh Haarsh Limbachiyaa Ganja Drug Case NCB Update | 14.74 Lakh Kg Of Weed Cannabis Caught In Five Years


https://ift.tt/367TY9M

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

जिन दुकानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी पूजा सामग्री मिलती थीं, वहां अब पीपीई किट और दस्ताने बिक रहे

निगमबोध घाट पहुंची 32 साल की कुसुम के पिता की मौत आज सुबह ही कोरोना से हुई है। वे दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में बीते पांच दिनों से भर्ती थे। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके पिता के शव को सील करके अपनी ही गाड़ी से निगमबोध घाट पहुंचाया है। अस्पताल के ही दो कर्मचारी पीपीई किट पहने इस शव को घाट तक लेकर आए हैं। कुसुम ने आखिरी वक्त में अपने पिता का चेहरा भी नहीं देखा था, लिहाजा वे निगमबोध घाट के सेवादारों से हाथ जोड़कर और बिलखते हुए प्रार्थना कर रही हैं कि उन्हें एक आखिरी बार अपने पिता का चेहरा देखने की अनुमति दी जाए। निगमबोध घाट के एक सेवादार कुसुम को समझाते हैं कि कोरोना संक्रमित शवों का चेहरा खोलने की अनुमति नहीं है और ऐसा करने से संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। लेकिन, अपने पिता के अंतिम दर्शन की कुसुम की जिद को देखते हुए ये सेवादार इसकी अनुमति दे देते हैं। कुसुम के पिता के शव को वापस उसी गाड़ी में कुछ देर के लिए रखा रखा जाता है, जिसमें अस्पताल से उन्हें यहां लाया गया था। पीपीई किट पहने दो लोग शव का चेहरा कुछ सेकंड के लिए खोलते हैं और जल्द ही शव को दोबारा सील करके चिता पर रख द...

लॉकडाउन में महिलाओं के खातों में 32% इजाफा, इनमें 70% पहली बार शेयर में इन्वेस्ट कर रहीं

कोरोना संकट के दौरान शेयर बाजार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिलाएं गोल्ड बाॅन्ड से लेकर म्यूचुअल फंड तक में निवेश कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार में निवेश करने वाली महिलाओं में अधिकतर पहली बार निवेश कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में वर्किंग वुमन्स और हाउस वाइफ हैं। ये महिलाएं ना सिर्फ शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं, बल्कि दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं। आइए पढ़ते हैं ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी, जो मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा रही हैं... अंकिता तोलानी - वर्किंग अंकिता तोलानी 28 साल की हैं। दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में जाॅब करती हैं। अंकिता 2016 से शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं। वो SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और गोल्ड बाॅन्ड में निवेश करती हैं। अंकिता कहती हैं,'पहली बार मैंने SIP में 1 लाख रुपए से निवेश शुरू किया था। अब हर साल डेढ़ से दो लाख रुपए निवेश करती हूं।' अंकिता पिछले तीन साल में करीब 10 लाख से ज्यादा निवेश कर चुकी हैं। वहीं, गोल्ड बाॅन्ड में अंकिता अब तक 7 लाख रुपए तक निवेश कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें गोल्ड बाॅन...