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CBSE के बोर्ड एग्जाम ऑनलाइन नहीं होंगे, शिक्षा मंत्री आज तारीखों का ऐलान करेंगे

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं कराने के लिए माथापच्ची कर रहा है। शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक आज शाम 6 बजे इन परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान करेंगे। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। इसमें उन्होंने साफ किया कि बोर्ड परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं होंगी। इन्हें कोरोना प्रोटोकॉल के तहत कराया जाएगा।

न्यूज एजेंसी से बातचीत में निशंक ने कहा कि परीक्षा गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक कराई जाएगी। स्टूडेंट्स की सुरक्षा तय करना हमारी पहली प्रायरिटी है। सरकार इस मामले में अलर्ट है और नए स्ट्रेन को लेकर सभी उपाय कर रही है।

तारीखों से छात्रों का भ्रम दूर होगा
इससे पहले उन्होंने कहा था कि परीक्षाओं को लेकर छात्रों में उलझन और भ्रम की स्थिति है। ऐसे में तारीखों की घोषणा होने से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों को आश्वस्त करता हूं कि परीक्षा से जुड़े सभी फैसले आपके हित और भविष्य को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे।



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एजुकेशन मिनिस्टर रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार को बताया कि एग्जाम के दौरान कोरोना प्रोटोकाल का ध्यान रखा जाएगा। -फाइल फोटो


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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...