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किसी महामारी ने साम्राज्य खत्म कर दिया तो किसी ने अमेरिका की 90% आबादी; कोई 700 साल बाद भी बेकाबू

पिछले साल नवंबर में चीन के वुहान में एक अलग तरह का फ्लू फैल रहा था। ठीक एक साल पहले 31 दिसंबर 2019 को WHO ने इसे वायरल निमोनिया बताया। यही वायरल निमोनिया हम सब के बीच कोविड-19 के रूप में पहुंचा। तीन महीने बाद 11 मार्च को WHO ने इसे महामारी घोषित कर दिया। कोरोना से अब तक दुनियाभर में 18 लाख मौतें हो चुकी हैं। जान गंवाने वालों में करीब 1.5 लाख भारतीय हैं।

2020 को हम अब तक का सबसे बुरा साल मान रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इंसान के हजारों साल के इतिहास कई ऐसे बरस बीते हैं, जिनमें कोई न कोई महामारी फैली और करोड़ों लोगों की जान चली गई। जस्टिनियन प्लेग ने करीब 1500 साल पहले एक साम्राज्य ही खत्म कर दिया। वहीं 15वीं सदी में चेचक ने अमेरिका की 90% आबादी को मार डाला था। करीब 100 साल पहले स्पैनिश फ्लू से 5 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। आइए जानते हैं ऐसी 10 महामारियों के बारे में, जिन्होंने हमारे पूर्वजों का पूरा साल बिगाड़ दिया था...

1. एंटोनियन प्लेग | सालः 165

रोम में फैली बीमारी से राजा समेत 50 लाख लोग मारे गए
इतिहास में जाएं तो साल 165 में पहली बार कोई महामारी फैली थी। उसे एंटोनियन प्लेग नाम दिया गया। माना जाता है कि रोम की सेनाएं जब मेसोपोटामिया से लौटीं, तो उनके साथ ही ये संक्रमण रोम में आ गया। इससे रोम में रोजाना 2 हजार लोगों की जान जा रही थी। 169 में इस संक्रमण से रोमन सम्राट लुसियस वेरस की भी मौत हो गई थी। तब इस महामारी से 50 लाख के आसपास लोगों की मौत हुई थी।

2. जस्टिनियन प्लेग | सालः 541

इस महामारी ने दुनिया की आधी आबादी की जान ले ली
एंटोनियन प्लेग के बाद जो महामारी फैली, उसका नाम था- जस्टिनियन प्लेग। ये महामारी साल 541 में एशिया, उत्तरी अफ्रीका, अरब और यूरोप में फैली थी। लेकिन, इसका सबसे ज्यादा असर पूर्वी रोमन साम्राज्य बाइजेंटाइन पर हुआ। इस महामारी ने 5 करोड़ लोगों की जान ले ली थी। ये उस वक्त की दुनिया की कुल आबादी का आधा हिस्सा थी। ये बीमारी इतनी खतरनाक थी कि इसने बाइजेंटाइन साम्राज्य को खत्म कर दिया था।

3. द ब्लैक डेथ | सालः 1347-1351

यूरोप में इतने मरे कि फिर से उतनी आबादी होने में 200 साल लगे
सन 1347 से 1351 के बीच एक बार फिर प्लेग फैला। इसे ब्यूबोनिक प्लेग नाम दिया गया। इसका सबसे ज्यादा असर यूरोप और एशिया में हुआ। उस समय ज्यादातर कारोबार समुद्री रास्ते से ही होता था। समुद्री जहाजों पर चूहे बहुत रहते थे। इन्हीं चूहों से मक्खियों के जरिए ये बीमारी फैलती गई। इस बीमारी से उस वक्त 20 करोड़ लोग मारे गए थे। ऐसा कहा जाता है कि इस बीमारी से अकेले यूरोप में इतनी मौतें हुई थीं कि उसे 1347 से पहले के पॉपुलेशन लेवल पर पहुंचने पर 200 साल लग गए थे। इसलिए इसे ब्लैक डेथ भी कहते हैं। ब्यूबोनिक प्लेग या ब्लैक डेथ आज भी खत्म नहीं हुई है।

4. स्मॉलपॉक्स | सालः 1492

यूरोप से आई बीमारी ने अमेरिका के 90% लोगों की जान ले ली
1492 में यूरोपियन्स अमेरिका पहुंचे। उनके आते ही अमेरिका में स्मॉलपॉक्स यानी चेचक नाम का संक्रमण फैल गया। इस बीमारी से संक्रमित 10 में 3 लोगों की मौत हो जाती थी। इससे 2 करोड़ अमेरिकियों की मौत हो गई थी, जो उस वक्त अमेरिका की कुल आबादी का 90% हिस्सा थी। इससे यूरोपियन्स को फायदा हुआ। उन्हें यहां खाली जगह मिल गई और उन्होंने अपनी कॉलोनियां बसानी शुरू कर दीं। चेचक अब भी खत्म नहीं हुई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे अब तक 35 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 1796 में डॉक्टर एडवर्ड जेनर ने इस बीमारी की वैक्सीन ईजाद कर ली।

5. हैजा | सालः 1817

ऐसी महामारी जो भारत में जन्मी और अमेरिका-अफ्रीका तक फैली
1817 में दुनिया में हैजा नाम की बीमारी फैली। इसे कॉलरा भी कहते हैं। ये वो बीमारी थी, जो भारत में जन्मी थी। ये बीमारी गंगा नदी के डेल्टा के जरिए एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में भी फैल गई थी। गंदा पानी पीना इस बीमारी का कारण था। इस बीमारी की वजह से उस समय 10 लाख से ज्यादा मौतें हुई थीं। WHO के मुताबि अभी भी हर साल 13 लाख से 40 लाख के बीच लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं। आज भी हर साल 1.5 लाख तक मौतें इस बीमारी से हो रही है।

6. स्पैनिश फ्लू | सालः 1918

5 करोड़ जानें लेने वाला फ्लू, अकेले भारत में 1.7 करोड़ लोग मरे
1918 में फैली फ्लू की महामारी को स्पैनिश फ्लू भी कहा जाता है। ये पिछले 500 साल के इतिहास की सबसे खतरनाक महामारी थी। ऐसा माना जाता है कि इस महामारी से उस वक्त दुनिया की एक तिहाई आबादी यानी 50 करोड़ लोग संक्रमित हुए थे। दुनियाभर में इससे 5 करोड़ से ज्यादा मौतें हुईं। अकेले भारत में ही इससे 1.7 करोड़ लोग मारे गए थे। ये बीमारी इतनी अजीब थी कि इसकी वजह से सबसे ज्यादा मौतें स्वस्थ लोगों की हुई थी। स्पैनिश फ्लू के लिए H1N1 वायरस जिम्मेदार था। ये वायरस आज भी हमारे बीच है और हर साल इंसानों को संक्रमित करता है।

7. एशियन फ्लू | सालः 1957

हॉन्गकॉन्ग से निकली बीमारी ने दुनियाभर के 11 लाख लोगों की जान ली
ये बीमारी फरवरी 1957 में हॉन्गकॉन्ग से शुरू हुई थी। चूंकि ये बीमारी पूर्वी एशिया से निकली थी, इसलिए इसे एशियन फ्लू कहा जाता है। ये बीमारी H2N2 वायरस की वजह से फैली थी। कुछ ही महीनों में बीमारी कई देशों में फैल गई। इससे दुनियाभर में 11 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे।

8. हॉन्गकॉन्ग फ्लू | सालः 1968

इस चीनी फ्लू ने ऐसे लोगों को शिकार बनाया जो पहले से ही बीमार थे
13 जुलाई 1968 को इस फ्लू का पहला केस हॉन्गकॉन्ग में मिला। इसी वजह से इसे हॉन्गकॉन्ग फ्लू कहा जाता है। हालांकि, कुछ जानकार ये भी मानते हैं कि ये चीन से हॉन्गकॉन्ग में आया। इस फ्लू के लिए H3N2 वायरस जिम्मेदार था। कुछ ही महीनों में ये वायरस वियतनाम, सिंगापुर, भारत, अमेरिका और यूरोप पहुंच गया। इस वायरस से मरने वाले ज्यादातर लोगों की उम्र 65 साल से ज्यादा थी। इसकी चपेट में ज्यादातर वही लोग आए थे, जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी थी। इस बीमारी की वजह से दुनियाभर में 10 लाख से ज्यादा मौतें हुई थीं।

9. HIV एड्स | सालः 1981

चिम्पैंजी से फैली बीमारी आज भी हर साल लाखों लोगों की जान ले रही
1981 में HIV वायरस फैला, जिसे ह्यूमन इम्युनो डेफिशिएंसी वायरस कहते हैं। इस वायरस से इंसानों में एड्स नाम की बीमारी फैलती है। ये बीमारी अफ्रीकी देश कॉन्गो की राजधानी किन्शासा से शुरू हुई थी। इस बीमारी की उत्पत्ति का कारण 30 साल बाद पता चला था। ये बीमारी चिम्पैंजी से इंसानों में फैली। उस समय किन्शासा बुशमीट का बड़ा बाजार था और यहीं से वायरस इंसानों में आया। इस बीमारी से अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा की जान जा चुकी है। WHO के अनुसार 2019 में एड्स से करीब 6.90 लाख लोग मारे गए थे। इसका अभी तक कोई असरदार इलाज नहीं मिल सका है।

10. स्वाइन फ्लू | सालः 2009

WHO ने 1 साल में ही महामारी की लिस्ट से हटाया, लेकिन आज भी जानलेवा
अप्रैल 2009 में स्वाइन फ्लू का पहला मामला मैक्सिको में सामने आया था। उसके बाद 13 मई को भारत में भी स्वाइन फ्लू का पहला मामला आया। 11 जून 2009 को इसे महामारी घोषित किया गया। स्वाइन फ्लू H1N1 वायरस की वजह से आया और ये वायरस सुअरों से इंसान में आया। अगस्त 2010 में WHO ने इसके महामारी नहीं रहने की घोषणा की थी। लेकिन, अब भी ये बीमारी हमारे बीच में है। स्वाइन फ्लू से दुनियाभर में अब तक 5.5 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसी साल सितंबर तक भारत में 44 लोग इससे संक्रमित होकर दम तोड़ चुके हैं।



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