Skip to main content

IIT मद्रास के फरमान पर विरोध में उतरे छात्र, स्टूडेंट्स के मोर्चा खोलते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूले

IIT मद्रास प्रशासन इन दिनों एक अलग तरह की चुनौती से परेशान है। कारण- यहां के ‘पशुप्रेमी’ छात्र 620 एकड़ के परिसर से कुत्तों को हटाए जाने के खिलाफ हैं। दरअसल, परिसर में जितने भी आवारा कुत्ते हैं, उन्हें कैंपस से बाहर निकाला जा रहा है। छात्रों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि उन्हें खाना न खिलाएं। हॉस्टल के नोटिस बोर्ड पर यह सूचना लगाई गई है कि अगर कोई छात्र कुत्ते-बिल्ली या अन्य जानवरों को परिसर में खाना खिलाते हुए देखा गया, तो उसे 10 हजार रुपए का जुर्माना भरना होगा। साथ ही उसे हॉस्टल सुविधा से भी वंचित कर दिया जाएगा।

IIT मद्रास प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ छात्र एकजुट होने लगे हैं। सोशल मीडिया में और ऑनलाइन पिटिशन के जरिए वे इस बात के लिए समर्थन जुटा रहे हैं कि कुत्तों को कैंपस से क्यों हटाया जा रहा है। लॉकडाउन के दौरान इन बेजुबानों को खाने के लिए कुछ देना क्या गुनाह है? इस मुद्दे पर संस्थान के ही पूर्व छात्र और कर्मचारी ट्राइफेना डडले ने तो एनिमल वेलफेयर बोर्ड और सांसद मेनका गांधी तक को ई-मेल भेजकर शिकायत दर्ज करवाकर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

नसबंदी के नाम पर गायब कर दिया जाता है
आईआईटी मद्रास की छात्रा रोशनी (बदला नाम) बताती हैं कि यहां कुत्तों को नसबंदी के नाम पर पकड़कर गायब कर दिया जाता है। मैं आईआईटी-मद्रास के वेलाचेरी गेट के पास कुत्तों को खाना खिलाती थी। मैंने उनमें से बहुत से पिल्लों को टीका लगवाया और नसबंदी भी करवाई है। इन्हीं में से एक काले-सफेद कलर का कुत्ता था- टैरी। लॉकडाउन के बाद मैं दो-तीन बार कैंपस गई, लेकिन ‘टैरी’ दिखाई नहीं दिया। कुछ दिनों बाद मुझे एक वीडियो देखने को मिला। इसमें दो लोग टैरी को कैंपस से जाल में पकड़कर ले जाते हुए दिखाई दे रहे थे। उसके बाद से टैरी आज तक कैंपस में नहीं दिखा।

रोशनी सवाल उठाती हैं कि कैंपस में किसी आवारा कुत्तों ने न तो किसी पर हमला किया और न ही नुकसान पहुंचाया, फिर उन्हें क्यों हटाया जा रहा है? अगर उनकी संख्या बढ़ गई है तो यह काम नगर पालिका का है। टैरी की हमने पैदा होने के बाद से ही देखभाल की है- उसे भी हटा दिया गया। वो एक मच्छर भी नहीं मार सकता, वो इंसानों के लिए कैसे खतरा बन सकता है। इस पर प्रशासन खामोश है।

कैंपस में हिरण का शिकार हुआ तो सभी कुत्तों को हटाया जा रहा है
आईआईटी मद्रास प्रशासन ने कैंपस से कुत्तों को हटाने का फैसला इसलिए लिया, क्योंकि पिछले दिनों कुछ आवारा कुत्तों ने एक हिरण का शिकार किया था। इस मुद्दे पर स्टाफ ने परिसर में जानवरों के कारण हो रही परेशानी शिकायत की थी। इस बारे में छात्रों का कहना था कि हॉस्टल के अंदर या कैंपस में आने वाले कुत्तों ने कभी किसी को कोई हानि नहीं पहुंचाई। छात्र अंकुश (बदला नाम) ने कहा कि कुत्तों की संख्या बढ़ रही है तो यह काम नगर पालिका का है। इस पर आईआईटी प्रशासन को फैसले का अधिकार नहीं है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
छात्रों का आरोप है कि कुत्तों को नसबंदी के नाम पर पकड़कर गायब कर दिया जाता है। (फाइल फोटो)


https://ift.tt/2TkdyIX

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

आर्मी कैन्टीन्स में विदेशी शराब समेत इम्पोर्टेड सामान बेचने पर बैन; आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा दिया जाएगा

केंद्र सरकार ने देश की 4 हजार आर्मी कैन्टीन्स को विदेशी सामान आयात न करने का आदेश दिया। इसमें महंगी विदेशी शराब भी शामिल है। सरकार ने यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्थानीय वस्तुओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया है। फैसले से पहले इस बारे में तीनों सेनाओं से सलाह ली गई है। कैन्टीन्स में सस्ता सामान मिलता है न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, देश में करीब चार हजार आर्मी कैन्टीन हैं। इनमें डिस्काउंट रेट्स पर सामान मिलता है। इसका फायदा वर्तमान और पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मिलता है। आमतौर पर विदेशी शराब और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की डिमांड ज्यादा रहती है। सरकार के फैसले के बाद अब आर्मी कैन्टीन्स में विदेशी सामान नहीं बेचा जा सकेगा। इनमें विदेशी शराब भी शामिल है। आर्मी कैन्टीन्स देश की सबसे बड़ी रिटेल चेन्स में से एक है। इनमें हर साल करीब 2 अरब की बिक्री होती है। कुछ दिन पहले जारी हुआ आदेश 19 अक्टूबर को डिफेंस मिनिस्ट्री ने विदेशी वस्तुओं के आयात पर बैन लगाने का आदेश जारी किया। इसमें कहा गया- डायरेक्ट इम्पोर्ट नहीं किया जा सकेगा। ऑर्डर के मुताबिक, इस बारे में आर्मी, एयरफो...