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पढ़िए, दि इकोनॉमिस्ट की इस हफ्ते की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

1. महामारी न फैलती तो ट्रम्प के जीतने की संभावना थी, वैसे उन्होंने देश को कई मोर्चों पर नुकसान पहुंचाया

2. महामारी के बाद भारत सहित कई देशों में अधिक बच्चों का जन्म संभव

3. कारीगरों की बढ़ती उम्र से मुसीबत, सिंगापुर में स्ट्रीट फूड सेंटरों के बंद होने का बढ़ता खतरा

4. पर्यावरण की ओर बढ़ते कदम, जलवायु के अनुकूल प्रोजेक्ट में 2.68 लाख करोड़ रुपए लगे



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कोरोना से लड़ने की हर्ड इम्युनिटी 60% से घटकर 43% हो सकती है क्योंकि लोग मिलने-जुलने से खुद को नहीं रोक रहे

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने हर्ड इम्युनिटी पर नया दावा पेश किया है। उनका कहना है कि कोरोना से लड़ने में लोगों की हर्ड इम्युनिटी का स्तरजितना पहले सोचा गया था, यह उससे भी नीचे गिर सकता है। यानी लोगों के समूह में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। हर्ड इम्युनिटी का मतलब होता है एक पूरे झुंड याआबादी की बीमारियों से लड़ने की सामूहिक रोग प्रतिरोधकता पैदा हो जाना। जैसे चेचक, खसरा और पोलियो के खिलाफ लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हुई थी। हर्ड इम्युनिटी गिरने का कारण लोगों को मिलना-जुलना रिसर्च करने वाली नॉटिंग्घम यूनिवर्सिटी केशोधकर्ता फ्रैंक बॉल के मुताबिक, इम्युनिटी के लिए आबादी में मौजूद हर एक इंसान को वैक्सीन लगना जरूरी है। रिसर्च के दौरान सामने आया कि हर्ड इम्युनिटी गिरने का स्तर लोगों की एक्टिविटी है न कि उनकी उम्र। महामारी के दौरान भी लोग एक-दूसरे से मिल रहे हैं, इसलिए इन्हें संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। इस तरह आबादी में जितना ज्यादा संक्रमण फैलेगा हर्ड इम्युनिटी का स्तर घटेगा। अलग-अलग उम्र के लोगों और उनकी गतिविधि का विश्लेषण किया गया शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन लगने के ...