Skip to main content

पाकिस्तान की संसद में लगे मोदी-मोदी के नारे? न्यूज चैनल का दावा पड़ताल में झूठ निकला

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर न्यूज चैनल ‘इंडिया टीवी’ का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान की संसद में मोदी-मोदी के नारे लगे।

न्यूज एंकर दीपक चौरसिया ने भी वीडियो इसी दावे के साथ शेयर किया।

टाइम्स नाऊ वेबसाइट की खबर में भी पाकिस्तान की संसद में मोदी के समर्थन में नारे लगने का दावा किया गया है।

और सच क्या है?

  • इंडिया टीवी न्यूज चैनल के वायरल वीडियो का बैकग्राउंड साउंड क्लियर न होने के चलते हमने अन्य सोर्सेस पर यही वीडियो तलाशना शुरू किया।
  • Duniya News यूट्यूब चैनल पर भी हमें यही वीडियो मिला। ध्यान से सुनने पर पता चलता है कि बैकग्राउंड से आ रहे जिस शोर को ‘मोदी-मोदी’ बताया जा रहा है। असल में वहां से ‘वोटिंग-वोटिंग’ चिल्लाने की आवाज आ रही है।

  • वीडियो के 6 सेकंड बीतने पर वोटिंग-वोटिंग की आवाज आती है। इसके जवाब में संसद के सभापति ये भी कहते दिख रहे हैं कि - ‘वोटिंग और सब कुछ होगा, सब्र रखें आप’
  • साफ है कि वायरल वीडियो में पाकिस्तान की संसद से मोदी-मोदी नहीं, वोटिंग-वोटिंग की आवाज आ रही है। सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा फेक है।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Fact Check: Modi-Modi slogans in Pakistan's Parliament? The claim found fake in the fact check investigation


https://ift.tt/2TIoxM9

Comments

Popular Posts

अब अपने दम पर और अपनी सोच से जॉब लेने का समय, लॉकडाउन में जो अंतरात्मा की आवाज सुनी थी उसे दबाइएगा मत

सूरज का एक सपना था कि मैं इंजीनियर बनूंगा। क्लास 8 से वो सपने को साकार करने में लगा था। पिताजी प्राइवेट कंपनी में साधारण पोस्ट पर थे मगर बच्चे की एजुकेशन में कोई कसर न छोड़ी। बढ़िया आईआईटी कोचिंग करवाई। आईआईटी में तो सिलेक्शन हुआ नहीं मगर एक ठीक-ठाक सरकारी कॉलेज में सीट मिल गई। फिर क्या था? आपको एडमिशन मिल गया तो समझो ‘लाइफ बन गई।’ यूं तो हम लेते हैं दाखिला कुछ पढ़ने के लिए पर हकीकत में उतना पढ़ते हैं कि पास हो जाएं। कॉलेज में कई नामी प्रोफेसर थे, इक्विपमेंट थे, मगर सूरज ने इनपर ध्यान नहीं दिया। उसे चाहिए थे अच्छे मार्क्स और नौकरी। मेकैनिकल इंजीनियर हो तो क्या हुआ, आप भी आईटी कंपनी के एंट्रेस एग्जाम में बैठ सकते हो। फैक्टरी से बेहतर एक चिल्ड एसी ऑफिस मिलेगा। सूरज ने भी यही रास्ता अपनाया। प्लेसमेंट भी हो गया। घर पर सब खुश। और फिर उथल-पुथल हो गई। मार्च में कोरोना फैला तो स्टूडेंट्स घर भागे। एग्जाम ऑनलाइन दिए या कैंसल हो गए। उससे भी बड़ी विपत्ति कि जॉब ऑफर कैंसल होने लगे। किसी कंपनी ने कहा जून में नहीं सितंबर में जॉइन करो। सूरज की कंपनी ने तो ऑफर ही वापस ले लिया। अब बैठे हैं जनाब बीटेक की ड...