Skip to main content

देश में इंटरनेट यूजर्स एक साल में 23% बढ़े; कोरोना काल में स्क्रीन टाइम 1 घंटे बढ़ा

दुनिया की आबादी करीब 800 करोड़ है। इनमें से 466 करोड़ लोग यानी करीब 60% आबादी इंटरनेट चला रही है। इनमें से 70 करोड़ भारत में हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल में लोग इंटरनेट पर ज्यादा वक्त बिताने लगे हैं।

इंटरनेट यूजर्स का स्क्रीन टाइम करीब एक घंटे बढ़ गया है। आज हम हर दिन औसतन 7 घंटे इंटरनेट पर बिता रहे हैं। अगर पूरी दुनिया का इंटरनेट पर बिताया जाने वाला वक्त जोड़ें, तो यह हर दिन 10 लाख साल के बराबर होता है।

  • दुनिया के इंटरनेट यूजर्स 1 साल में 32.1 करोड़ यानी 7.4% बढ़े। दुनिया की आबादी 1% बढ़ी।
  • 18 करोड़ लोग जुलाई से सितंबर तक सोशल मीडिया से जुड़े, यानी हर दिन करीब 20 लाख।
  • भारत में इंटरनेट यूजर्स एक साल में 23% बढ़े। ज्यादातर इंटरनेट यूजर्स की उम्र 16 से 64 साल।
  • 91% यूजर्स अपने मोबाइल पर इंटरनेट चलाते हैं। अन्य लोग कंप्यूटर या दूसरे साधनों पर चलाते हैं।

दुनिया में हर सेकंड 14 लोग इंटरनेट से जुड़ते हैं

  • 2.29 घंटे हम औसतन रोज सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं।
  • अक्टूबर 2019 से अक्टूबर 2020 तक 45 लाख से ज्यादा यूजर्स सोशल मीडिया पर एक्टिव हुए हैं।
  • इसमें सालाना 12% की ग्रोथ दर्ज की गई है। हर सेकंड करीब 14 लोग इंटरनेट से जुड़ रहे हैं।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
हम हर दिन औसतन 7 घंटे इंटरनेट पर बिता रहे, दुनिया का वक्त जोड़ें तो हर रोज 10 लाख साल।- प्रतीकात्मक फोटो।


https://ift.tt/3kDokpB

Comments

Popular Posts

अब अपने दम पर और अपनी सोच से जॉब लेने का समय, लॉकडाउन में जो अंतरात्मा की आवाज सुनी थी उसे दबाइएगा मत

सूरज का एक सपना था कि मैं इंजीनियर बनूंगा। क्लास 8 से वो सपने को साकार करने में लगा था। पिताजी प्राइवेट कंपनी में साधारण पोस्ट पर थे मगर बच्चे की एजुकेशन में कोई कसर न छोड़ी। बढ़िया आईआईटी कोचिंग करवाई। आईआईटी में तो सिलेक्शन हुआ नहीं मगर एक ठीक-ठाक सरकारी कॉलेज में सीट मिल गई। फिर क्या था? आपको एडमिशन मिल गया तो समझो ‘लाइफ बन गई।’ यूं तो हम लेते हैं दाखिला कुछ पढ़ने के लिए पर हकीकत में उतना पढ़ते हैं कि पास हो जाएं। कॉलेज में कई नामी प्रोफेसर थे, इक्विपमेंट थे, मगर सूरज ने इनपर ध्यान नहीं दिया। उसे चाहिए थे अच्छे मार्क्स और नौकरी। मेकैनिकल इंजीनियर हो तो क्या हुआ, आप भी आईटी कंपनी के एंट्रेस एग्जाम में बैठ सकते हो। फैक्टरी से बेहतर एक चिल्ड एसी ऑफिस मिलेगा। सूरज ने भी यही रास्ता अपनाया। प्लेसमेंट भी हो गया। घर पर सब खुश। और फिर उथल-पुथल हो गई। मार्च में कोरोना फैला तो स्टूडेंट्स घर भागे। एग्जाम ऑनलाइन दिए या कैंसल हो गए। उससे भी बड़ी विपत्ति कि जॉब ऑफर कैंसल होने लगे। किसी कंपनी ने कहा जून में नहीं सितंबर में जॉइन करो। सूरज की कंपनी ने तो ऑफर ही वापस ले लिया। अब बैठे हैं जनाब बीटेक की ड...