Skip to main content

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा के नाती ने अवैध संबंधों के शक में पत्नी की हत्या की

इंदौर के जावरा कम्पाउंड में मंगलवार रात पूर्व विधानसभा अध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा के नाती हर्ष शर्मा (23) ने कुत्ते को बांधने वाली चेन से गला घोंटकर 2 महीने की प्रेग्नेंट पत्नी अंशु (22) की हत्या कर दी। इसके बाद गुप्ती से उस पर कई वार किए। हर्ष को शक था कि अंशु के पूर्व मंगेतर सचिन से संबंध हैं।

हत्या के बाद 1 घंटे तक शव के पास बैठा रहा, फिर थाने पहुंच गया
मंगलवार रात को भी हत्या के पहले किसी का वॉट्सऐप कॉल आया था, जिसमें कहा गया था कि अंशु अब भी सचिन के संपर्क में है। इस पर दोनों में विवाद हुआ और हर्ष ने अंशु की हत्या कर दी। यह पता नहीं चल पाया कि वॉट्सऐप कॉल किसका था। हर्ष एक घंटे तक अंशु के शव के पास बैठा रहा। फिर पलासिया में रहने वाले पिता राजीव शर्मा को फोन किया। इसके बाद खुद संयोगितागंज थाने पहुंचा और बोला मैंने पत्नी की हत्या कर दी है। दोनों ने ढाई महीने पहले ही शादी की थी।

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया।

जुलाई में दोनों कॉन्टैक्ट में आए, अगस्त में भागकर शादी की थी
हर्ष ने लॉकडाउन के दौरान जून में जैविक खाद का बिजनेस शुरू किया। जुलाई में अंशु ने बतौर रिसेप्शनिस्ट नौकरी ज्वॉइन की। दोनों में नजदीकियां बढ़ी। 25 जुलाई को हर्ष ने कंपनी बंद कर दी। 6 अगस्त को दोनों गायब हो गए और 19 अगस्त को आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। बाद में वे जावरा कम्पाउंड के फ्लैट में रहने लगे।

हालांकि, अंशु की मां संतोष उसकी सगाई सचिन से करा चुकी थी। 8 अगस्त को उन्होंने विजयनगर थाने में अंशु की गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी। हालांकि कुछ दिन बाद उन्हें दोनों की शादी का पता चल गया। हर्ष के पिता राजीव का शेयर एडवाइजरी का काम है। वे पत्नी से अलग रहते हैं। उन पर भी धोखाधड़ी मामला दर्ज है।

अंशु की मां ने थाने के बाहर शव रखकर इंसाफ मांगा
पोस्टमार्टम के बुधवार दोपहर संतोषबाई और परिजन अंशु का शव लेकर संयोगितागंज थाने पहुंच गए। शव को थाने के सामने रख चक्काजाम किया। संतोषबाई अड़ गईं कि उन्हें आरोपी हर्ष से मिलवाया जाए। CSP पूर्ति तिवारी ने किसी तरह उन्हें समझाया।

अंशु के परिजन सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करते हुए।

अंशु की मां का आरोप- हर्ष के पिता भी दोषी, बाप-बेटे को फांसी हो
अंशु ने इंटरव्यू देकर हर्ष की कंपनी ज्वॉइन की थी। वह उसे 8 हजार रुपए महीने देता था। शादी के बाद हर्ष नशे में अंशु से बदसलूकी करता था। अंशु की मां ने बताया, "14 सितंबर को बेटी का बर्थ डे था। मैंने दोनों को बुलाया, लेकिन हर्ष उसे नहीं लाया। मंगलवार रात हर्ष के पिता राजीव ने फोन किया और पूछा कि अंशु से बात हुई क्या? मैंने मना किया तो हालचाल पूछे और फोन काट दिया। पता नहीं बेटी को कब मार डाला। हर्ष और उसके पिता दोषी हैं, उन्हें फांसी की सजा मिले।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
अंशु और आरोपी हर्ष जुलाई में कॉन्टैक्ट में आए थे। एक महीने बाद ही दोनों ने घर से भागकर आर्य समाज मंदिर में शादी की थी।- फाइल फोटो।


https://ift.tt/2TxPzWM

Comments

Popular Posts

आप शेयर ट्रेडिंग करते हैं तो यह जानना आपके लिए जरूरी है; एक सितंबर से बदल रहा है मार्जिन का नियम

शेयर बाजार में एक सितंबर से आम निवेशकों के लिए नियम बदलने वाले हैं। अब वे ब्रोकर की ओर से मिलने वाली मार्जिन का लाभ नहीं उठा सकेंगे। जितना पैसा वे अपफ्रंट मार्जिन के तौर पर ब्रोकर को देंगे, उतने के ही शेयर खरीद सकेंगे। इसे लेकर कई शेयर ब्रोकर आशंकित है कि वॉल्युम नीचे आ जाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह नया नियम और आपकी ट्रेडिंग को किस तरह प्रभावित करेगा? सबसे पहले, यह मार्जिन क्या है? शेयर मार्केट की भाषा में अपफ्रंट मार्जिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक है। यह वह न्यूनतम राशि या सिक्योरिटी होती है जो ट्रेडिंग शुरू करने से पहले निवेशक स्टॉक ब्रोकर को देता है। वास्तव में यह राशि या सिक्योरिटी, बाजारों की ओर से ब्रोकरेज से अपफ्रंट वसूली जाने वाली राशि का हिस्सा होती है। यह इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग से पहले वसूली जाती है। इसके अलावा स्टॉक्स में किए गए कुल निवेश के आधार पर ब्रोकरेज हाउस भी निवेशक को मार्जिन देते थे। यह मार्जिन ब्रोकरेज हाउस निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी। इसे ऐसे समझिए कि निवेशक ने एक लाख रुपए के स्टॉक्स खरीदे हैं। इस...

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...