Skip to main content

कोरोनावायरस के अलावा स्कूल में नया खतरा कर रहा बच्चों का इंतजार, महीनों से बंद पानी के सिस्टम में मिल रहा लेजियोनेला बैक्टीरिया

मैक्स हॉर्बरी. कोरोनावायरस के कारण बंद पड़े स्कूलों का दोबारा खुलना फिलहाल तय नहीं है, लेकिन सरकार इसको लेकर विचार कर रही है। अब जब स्कूल खुलने को लेकर चर्चा जोरों पर है तो बच्चों, शिक्षकों और पैरेंट्स के मन में संक्रमण का डर होना लाजमी है। ऐसे में कई महीनों से बंद पड़े स्कूलों में कोरोना के अलावा एक नया खतरा भी बच्चों का इंतजार कर रहा है। अमेरिका के कुछ स्कूलों के वॉटर सिस्टम में लेजियोनेला नाम का बैक्टीरिया मिल रहा है।

क्या है लेजियोनेला बैक्टीरिया?
बीते हफ्ते अमेरिका के ओहायो में अधिकारियों को पांच स्कूलों में लेजियोनेला वायरस मिला। इसके अलावा पैंसिलवेनिया में भी अधिकारियों ने चार स्कूलों में यह बैक्टीरिया पाया। लेजियोनेला वायरस स्कूल भवनों के पानी की सप्लाई में हो सकता है।

लेजियोनेला को लेजियोनेला न्यमोफीलिया के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बैक्टीरिया है, जिससे लीजियोनेयर्स बीमारी हो सकती है। यह सांस संबंधी बीमारी है। यह ठहरे हुए पानी में तैयार हो सकता है और बाद में हवा के जरिए फैल सकता है। यह बैक्टीरिया सांस के जरिए इंसान के शरीर तक पहुंच सकता है।

सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, यह 10 में से एक मामले में घातक भी हो सकता है। हालांकि छोटे बच्चों में लिजियोनेयर्स बीमारी का जोखिम कम होता है, लेकिन बड़े बच्चों, व्यस्क और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगो को खतरा ज्यादा होता है।

एक्सपर्ट्स की चिंता- इसको लेकर मैनेजमेंट के पास नहीं है कोई प्लान
बच्चों को वायरस से बचाने के लिए कई स्कूल मार्च से ही बंद हैं। ऐसे में इन स्कूलों के बाथरूम, कैफेटेरिया और स्पोर्ट की जगह उपयोग में नहीं आई है। एक्सपर्ट्स को चिंता है कि लॉकडाउन के दौरान सप्लाई में पानी रुका हुआ है और स्कूल के पास कोई प्लान नहीं है।

इंडियाना में पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में सिविल, एनवायरमेंटल और इकोलॉजिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रयू व्हेल्टन कहते हैं, "आमतौर पर स्कूलों के पास वॉटर मैनेजमेंट प्लान नहीं होता है। यह कल्पना है कि ज्यादातर के पास मैनेजमेंट होता है। मेरे अनुभव में तो नहीं है।"

कोरोना से सुरक्षा करने के चक्कर में हो सकते हैं बैक्टीरिया का शिकार
कोरोनावायरस से बचाव के स्कूल जो उपाय करेंगे वो भी लेजियोनेला को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए कई स्कूलों ने सोशल डिस्टेंसिंग के लिए सभी सिंक बंद कर दिए हैं। खिलाड़ियों और कोच की सुरक्षा के लिए कुछ स्पोर्ट्स सुविधाएं भी बंद हैं। ऐसे में ठहरे हुआ पीने के पानी की जगहें बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अच्छी हो सकती हैं। लॉकर रूम में पाए जाने वाले शॉवर लीजियोनेला के बढ़ने की आम जगह होती है।

अगर फैसेलिटी मैनेजर्स दोबारा स्पोर्ट्स सुविधाएं शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें बैक्टीरिया को लेकर उपाय करने होंगे। डॉक्टर व्हेल्टन ने कहा कि बिल्डिंग को मैनेज करने वाले कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि आप शॉवर और टॉयलेट के जरिए लीजियोनेला का शिकार हो सकते हैं।

सीडीसी ने जारी की हैं गाइडलाइंस
सीडीसी ने कोरोनावायरस लॉकडाउन के बाद भवनों को शुरू करने के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। एजेंसी की प्रवक्ता ने कहा, "उनकी गाइडलाइंस स्कूल समेत सभी तरह की बिल्डिंग्स पर लागू होती हैं।" डॉक्टर व्हेल्टन के मुताबिक, कई गाइडलाइंस की अस्पष्टता का मतलब है स्कूल कम से कम और ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा उपाय कर आज्ञाकारी होने का दावा करेंगे।

पानी को फ्लश करते रहना बहुत जरूरी है
लेजियोनेला को बढ़ने से रोकने का एक उपाय है फ्लशिंग। सिस्टम में साफ पानी लाने से क्लोरीन की छोटी खुराक बनी रहती है, जो बैक्टीरिया के बढ़ने को रोकती है। जबकि फ्लशिंग प्रक्रिया को रोज किया जाना चाहिए। इसका मतलब है हर नल, शॉवर और टॉयलेट का चलते रहना।

बैक्टीरिया मिलने वाले स्कूलों में से एक ओहायो के एंगलवुड एलिमेंट्री में जुलाई से ही फ्लशिंग प्रक्रिया शुरू हो गई थी। जब वॉटर मैनेजमेंट कंपनी को बीते हफ्ते पानी में लेजियोनेला मिला तो उन्हें पूरे भवन की सप्लाई को बंद कर पूरे सिस्टम में बड़े स्तर की क्लोरीन डाल दी थी। डिस्ट्रिक्ट की प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा को पक्का करने के लिए वे लगातार पानी की जांच कर रहे हैं।

हालांकि, फ्लशिंग एक बार में लेजियोनेला को खत्म नहीं करती है। पानी को टेस्ट करने बाद ही फ्लशिंग के प्रभाव के बारे में पता चलता है। ओहायो के मिल्टन यूनियन हाई स्कूल ने जुलाई के आखिर में वॉटर टेस्टिंग शुरू कर दी थी। उन्होंने पाया कि 72 घंटे के बाद क्लोरीन का स्तर शून्य हो गया था। 24 घंटे बाद इसका स्तर फिर शून्य हो गया। बाद में उन्होंने पानी की जांच की और पाया कि पानी में लेजियोनेला है।

क्लोरीन के उपयोग के बाद भी तैयार हो जाता है बैक्टीरिया
पर्ड्यू में पोस्टडॉक्टरल फैलो कैटलिन प्रोक्टर लॉकडाउन के दौरान लेजियोनेला पर स्टडी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि क्लोरीन के उपयोग के बावजूद बैक्टीरिया की बायोफिल्म उन्हें पूरी तरह खत्म होने से बचाती हैं। कैटलिन ने बताया "डिसइंफेक्ट के खत्म होने के बाद वे फिर तैयार हो सकते हैं।"

पिट्सबर्ग के फॉक्स चैपल एरिया स्कूल डिस्ट्रिक्ट के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने पैरेंट्स को ईमेल कर दिया है कि वे सिस्टम के जरिए पानी में तेज गर्म पानी भेज रहे हैं। इस प्रक्रिया को थर्मल शॉक कहा जाता है। बैक्टीरिया को मारने के उपाय के तौर पर इसका प्रस्ताव काउंटी के हेल्थ अथॉरिटीज ने दिया था। हालांकि, कुछ इंडस्ट्री समूह बैक्टीरिया को रोकने के लिए थर्मल शॉक के प्रभाव पर सवाल उठाते हैं।

बजट भी एक समस्या
कुछ स्कूलों के पास लेजियोनेला टेस्ट और दूसरे पानी से संबंधित खतरों की जांच का बजट नहीं है। ऐसे स्कूल भी सही सलाह की कमी से जूझ रहे हैं। उदाहरण के लिए फ्लशिंग के तुरंत बाद पानी की जांच करना टेस्ट को अप्रभावी बना देगा। क्योंकि, ताजा पानी जाता है और लेजियोनेला नजर नहीं आएगा।

पॉलिटेक्निक मॉन्ट्रियल में सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसर मिशेल प्रेवोस्ट ने कहा, "आपको फ्लश करने के तुरंत बाद मापना नहीं है, लेकिन यह चीज गाइडलाइंस में साफ नहीं है।" जानते हुए या न जानते हुए ये स्कूल टेस्ट में चीटिंग कर रहे हैं।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
In addition to coronavirus, children waiting for new danger in school, Legionella bacteria found in closed water system for months


https://ift.tt/2EDp0LT

Comments

Popular Posts

छोटे बच्चों पर भी थी मौलानाओं की नजर:18 साल से कम उम्र के बच्चों को करते थे गुमराह, माइंड वॉश के बाद धर्मांतरण करवाते थे; कानपुर में 14 साल का बच्चा था निशाने पर

https://ift.tt/eA8V8J

केंद्र सरकार ने देशभर के कर्मचारियों के लिए नहीं जारी की गाइडलाइन, सिर्फ एक विभाग के लिए जारी हुए सर्कुलर से फैला कन्फ्यूजन

क्या वायरल : केंद्र सरकार ने देश भर के कर्मचारियों के लिए गाइडलाइन जारी की हैं। जिनके अनुसार एक दिन में अधिकतम 20 लोगों का स्टाफ ही एक ऑफिस में काम करेगा। कंटेनमेंट जोन में रहने वाले लोगों को ऑफिस नहीं आना होगा। इस तरह के 11 बिंदुओं की गाइडलाइन से जुड़ा एक सर्कुलर इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। इस तरह के ट्वीट वायरल हो रहे हैं https://twitter.com/JantaKaSafar/status/1270232058653261824 https://twitter.com/shubh_tree फैक्ट चेक पड़ताल - सबसे पहले हमने यह क्रॉस चेक किया कि वायरल हो रहा सर्कुलर असली है या नहीं। एएनआई के ऑफिशियल ट्विटरहैंडल पर भी यही सर्कुलर ट्वीट किया गया है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह फर्जी नहीं है। संभवत: एएनआई द्वारा यह सर्कुलर ट्वीट किए जाने के बाद ही कई न्यूज वेबसाइट्स ने यह खबर पब्लिश की कि केंद्र सरकार ने देश भर के दफ्तरों के लिए गाइडलाइन जारी की हैं। इसके बाद ही सोशल मीडिया पर भी यह खबर वायरल हुुई। -सर्कुलर के पहले पैराग्राफ को ही ध्यान से पढ़ें तो यह समझ आ जाता है कि ये सभी कर्मचारियों के लिए नहीं है। पहले पैराग्राफ की अंतिम लाइन में लिखा है - All officers i...