Skip to main content

रिमोट लर्निंग असरदार हो इसके लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल जरूरी, प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहें बच्चे और पैरेंट्स

क्रिश्चियन कैरन. महमारी के कारण लाखों छात्र ऑनलाइन क्लासेज लेने को मजबूर हैं। ऐसे में छोटे बच्चों के माता-पिता के भी वर्चुअल लर्निंग के मामले में समय, शेड्यूल और टेक्नोलॉजी जैसे कई चीजों को लेकर परेशान हैं। ऐसे में एक सवाल जिसको लेकर ज्यादा चर्चा नहीं हुई, वह है प्राइवेसी। सवाल उठता है कि रिमोट लर्निंग कैसे हमारी प्राइवेसी को नुकसान पहुंचा रही है और इससे बचने के लिए हम क्या कर सकते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट में लर्निंग टेक्नोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर टोरी ट्रस्ट ने कहा, "मेरे हिसाब से सबसे बड़ी परेशानी यह है कि हम क्लासरूम जैसी चीजों को वर्चुअल तरीके से दोहराने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने कहा- खासतौर से महामारी के दौरान यह सच है, जब कई सारे मानसिक तनाव झेलने वाले छात्रों को रिमोट लर्निंग के माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसे में सात एक्सपर्ट्स की मदद से जानिए कैसे बच्चों को सुरक्षित रखें।

बच्चों से प्राइवेसी को लेकर बात करें
एजुकेशनल कंसल्टेंट और क्लिनिकल सोशल वर्कर जेन कोर्ट ने कहा, "यह पैरेंट्स के लिए जरूरी है कि बच्चों से प्राइवेसी को लेकर बात करें। जानें कि उनके हिसाब से क्या निजी है और क्या नहीं।" उन्होंने कहा कि यह एक बार की जाने वाली चर्चा नहीं है। प्राइवेसी को लेकर सभी की एक आम समझ होती है। वो है कि किसी और के निजी जीवन में झांकना। हालांकि लोगों की प्राइवेसी की परिभाषा अलग-अलग होती है और इस बात पर निर्भर करती है कि वे कहां और किससे संपर्क में हैं। ऑनलाइन या ऑफलाइन।

पैरेंट्स बच्चों की प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं को जानने में जरूरी भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अपनी चिंताओं को जाहिर करने में बच्चों की भी मदद करते हैं। फ्यूचर ऑफ प्राइवेसी फोरम यूथ एंड एजुकेशन प्राइवेसी की डायरेक्टर एमीलिया वेंस कहती हैं कि बच्चों को यह बताना चाहिए कि अगर वे ऑनलाइन लर्निंग में असहज महसूस कर रहे हैं तो टीचर्स या पैरेंट्स को इस बात की जानकारी दें।

बच्चों की चिंताओं के बारे में जानें
बच्चों को क्या चिंताएं हो सकती हैं इस बात को जानने के लिए समय दें। क्या वे इस बात से चिंतित हैं कि टीचर उनकी क्लास को रिकॉर्ड कर लेंगे। अगर ऐसा है तो उनकी रिकॉर्डिंग कितनी देर तक सुरक्षित तरीके से रखी जाएगी। क्या वे कैमरा या वॉट्सऐप पर नजर आने को लेकर घबरा रहे हैं। क्या वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि दूसरे छात्र क्लास का स्क्रीनशॉट लेंगे या उनके घर के बारे में क्या सोचेंगे।

वीडियो के जरिए पढ़ाई करने वाले बच्चे इस बात को लेकर भी चिंतित हो सकते हैं कि टीचर्स उनके हाल को देखकर क्या सोचेंगे। कोर्ट सलाह देती हैं कि टीचर्स को निजी तौर पर बच्चे के हालचाल लेने चाहिए, ताकि उन्हें पता लग सके कि वे बच्चों के हाव-भाव को सही तरीके से समझ पा रहे हैं।

कैमरा उपयोग को लेकर बात करें
बच्चों से क्लास के दौरान कैमरे के उपयोग को लेकर बात करें और उन्हें बताएं कि उनके पास कई ऑप्शन्स हैं। डॉक्टर ट्रस्ट ने कहा "बच्चों से उनका वीडियो शुरू करने के लिए कहना ठीक ऐसा ही है जैसे आप उनके घर में जा रहे हैं और बिना इजाजत के पढ़ा रहे हैं। टीचर्स और उनके साथी ऐसी चीजें देख सकते हैं जो बच्चे पर गलत प्रभाव डाल सकती हैं।" उन्होंने कहा कि टीचर्स को छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने को लेकर सक्रिय होना होगा। वीडियो कैमरा शुरू करने को लेकर स्टूडेंट्स के साथ बातचीत भी होना चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि कब वीडियो जरूरी हो सकता है और कब वे इसे बंद कर सकते हैं।

मानसिक परेशानी से जूझ रहे बच्चों को जरूरी है वीडियो ऑप्शन
ऐसा उन बच्चों के साथ जरूरी है, जो किसी चोट से गुजर रहे हैं। हो सकता है कि ये छात्र खुद को स्क्रीन पर देखकर असहज हो जाएं। फैकल्टी डेवलपमेंट और ऑनलाइन टीचिंग और लर्निंग स्पेशलिस्ट केरन कोस्टा ने कहा कि अगर ऐसा है तो आमतौर पर मिरर व्यू को बंद करना मुमकिन होता है।

कोस्टा ने कहा "हम हमारे सभी सीखने वालों को यह चॉइस देना चाहते हैं कि वे कैमरे पर आना चाहते हैं या नहीं।" कोस्टा खासतौर से कॉलेज के छात्र और फैकल्टी को पढ़ाती हैं। अगर स्टूडेंट्स वीडियो पर नहीं आना चाहता और उनके स्कूल में चैट फोरम्स हैं तो ये चैट्स उन्हें लर्निंग में मदद कर सकती हैं। कोस्टा ने कहा "मैं चैट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करती हूं। अगर हम इसे बंद कर देंगे तो हम सीखने के कई कीमती मौकों को भी बंद कर देंगे।"

कैमरे के फायदों पर भी विचार करें
कैमरे का कब और कैसे इस्तेमाल करना है इस मामले में परिवारों को या तो सबकुछ या तो कुछ नहीं, जैसी सोच रखने की कोई जरूरत नहीं है। उदाहरण के लिए हो सकता है कि बच्चा ब्रेक सेशन के लिए कैमरा चालू रखना चाहता है, लेकिन दूसरी एक्टिविटीज के लिए बंद कर देता है।

बच्चे खुद का बैकग्राउंड तैयार कर सकते हैं
वीडियो फॉर्मेट में पढ़ाई की आदत डालने के लिए बच्चों को वन-ऑन-वन सेशन फायदेमंद होता है। या हो सकता है कि वे स्कूल की शुरुआत में कैमरे को बंद रखें, लेकिन बाद में शुरू कर दें। connectsafely.org में के-12 एजुकेशन के डायरेक्टर कैरी गैलेघर घर में एक स्पॉट तय करने की सलाह देती हैं, जहां बच्चा आसानी से रोज अपना स्कूल जारी रख सके।

जो बच्चे अपने घर को दिखाना नहीं चाहते वे डिजिटल बैकग्राउंड की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा वे फैब्रिक या पोस्टर बोर्ड्स जैसे मटैरियल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। कैरी भी टीचर हैं और स्कूल में असिस्टेंट प्रिंसिपल हैं। वे बच्चों को वीडियो पर रहने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उनका कहना है कि बच्चे के बॉडी लैंग्वेज और फेशियल एक्सप्रेशन्स की मदद से टीचर्स को यह जानने में मदद मिल सकती है कि बच्चा समझ पा रहा है या नहीं।

उन्होंने कहा "अगर मैं उनका चेहरा नहीं देख सकती तो मैं यह नहीं बता सकती की वे समझ पा रहे हैं या नहीं।" हालांकि, अगर कोई प्राइवेसी की चिंता है या बच्चा कैमरे के सामने कंफर्टेबल नहीं है तो कैरी पैरेंट्स को स्कूल में बात करने की सलाह देती हैं।

जानें बच्चा किन टूल्स को इस्तेमाल कर रहा है
मॉन्टक्लैयर में रहने वाली तीन बच्चों की मां ओल्गा गार्सिया काप्लान का कहना है, "मेरी सबसे बड़ी चिंता है कि स्कूल या टीचर्स ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं जिसका निरीक्षण नहीं किया गया या बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है।" उन्होंने कलेक्ट की जा रही जानकारी को लेकर भी सवाल किए।

के-12 साइबर सिक्युरिटी रिसोर्स सेंटर के मुताबिक, 2016 से अब तक अमेरिका के स्कूलों में 900 साइबर सिक्युरिटी से जुड़े मामले सामने आए। ऑनलाइन लर्निंग कंसोर्टियम की सीईओ जैनिफर मैथेस ने कहा "पैरेंट्स के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि क्या जानकारी कलेक्ट की जा रही है औ इसके उपयोग के बारे में जानना उन्हें ज्यादा बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा।"

अगर आपका बच्चा इतना बड़ा है कि खुद का फोन चला रहा है तो यह पक्का करें कि वे ऐसी किसी ऐप को डाउनलोड न करें जो स्कूल की स्कूल की जांच से न गुजरी हो। ऑनलाइन क्लासेज में पासवर्ड होना चाहिए और जिस तरह से टीचर पासवर्ड शेयर करते हैं वह सार्वजनिक नहीं होना चाहिए। यह जानना भी मददगार हो सकता है कि टीचर कैसे बच्चे की अटेंडेंस ले रहे हैं या प्रोग्रेस का ध्यान रख रहे हैं।

वेंस माता-पिता को बच्चों मजबूत पासवर्ड और डाटा ट्रैकिंग को रोकने वाले टूल्स का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। आखिरकार क्लास रूम में किसी भी नए टूल का उपयोग करने से पहले टीचर्स को टूल जांचने की प्रक्रिया को जानना चाहिए। वेंस ने कहा "अगर स्कूल के पास ऐसी कोई प्रोसेस नहीं है तो टीचर्स को हर टूल के डाटा कलेक्शन का रिव्यु करना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि वे सरकार की गाइडलाइंस से मिलती और स्टूडेंट के लिए सुरक्षित हैं या नहीं।"



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
According to experts - for safe remote learning, safe digital environment is necessary, children and parents should be cautious about privacy


https://ift.tt/32HU1Gn

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

जिन दुकानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी पूजा सामग्री मिलती थीं, वहां अब पीपीई किट और दस्ताने बिक रहे

निगमबोध घाट पहुंची 32 साल की कुसुम के पिता की मौत आज सुबह ही कोरोना से हुई है। वे दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में बीते पांच दिनों से भर्ती थे। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके पिता के शव को सील करके अपनी ही गाड़ी से निगमबोध घाट पहुंचाया है। अस्पताल के ही दो कर्मचारी पीपीई किट पहने इस शव को घाट तक लेकर आए हैं। कुसुम ने आखिरी वक्त में अपने पिता का चेहरा भी नहीं देखा था, लिहाजा वे निगमबोध घाट के सेवादारों से हाथ जोड़कर और बिलखते हुए प्रार्थना कर रही हैं कि उन्हें एक आखिरी बार अपने पिता का चेहरा देखने की अनुमति दी जाए। निगमबोध घाट के एक सेवादार कुसुम को समझाते हैं कि कोरोना संक्रमित शवों का चेहरा खोलने की अनुमति नहीं है और ऐसा करने से संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। लेकिन, अपने पिता के अंतिम दर्शन की कुसुम की जिद को देखते हुए ये सेवादार इसकी अनुमति दे देते हैं। कुसुम के पिता के शव को वापस उसी गाड़ी में कुछ देर के लिए रखा रखा जाता है, जिसमें अस्पताल से उन्हें यहां लाया गया था। पीपीई किट पहने दो लोग शव का चेहरा कुछ सेकंड के लिए खोलते हैं और जल्द ही शव को दोबारा सील करके चिता पर रख द...

लॉकडाउन में महिलाओं के खातों में 32% इजाफा, इनमें 70% पहली बार शेयर में इन्वेस्ट कर रहीं

कोरोना संकट के दौरान शेयर बाजार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिलाएं गोल्ड बाॅन्ड से लेकर म्यूचुअल फंड तक में निवेश कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार में निवेश करने वाली महिलाओं में अधिकतर पहली बार निवेश कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में वर्किंग वुमन्स और हाउस वाइफ हैं। ये महिलाएं ना सिर्फ शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं, बल्कि दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं। आइए पढ़ते हैं ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी, जो मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा रही हैं... अंकिता तोलानी - वर्किंग अंकिता तोलानी 28 साल की हैं। दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में जाॅब करती हैं। अंकिता 2016 से शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं। वो SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और गोल्ड बाॅन्ड में निवेश करती हैं। अंकिता कहती हैं,'पहली बार मैंने SIP में 1 लाख रुपए से निवेश शुरू किया था। अब हर साल डेढ़ से दो लाख रुपए निवेश करती हूं।' अंकिता पिछले तीन साल में करीब 10 लाख से ज्यादा निवेश कर चुकी हैं। वहीं, गोल्ड बाॅन्ड में अंकिता अब तक 7 लाख रुपए तक निवेश कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें गोल्ड बाॅन...