Skip to main content

ट्रम्प और बाइडेन के बीच फर्स्ट प्रेसिडेंशियल डिबेट आज; 90 मिनट की बहस में 6 मुद्दे होंगे, जानें 24 दिन में होने वाली 3 डिबेट्स से जुड़ी अहम बातें

अमेरिका में राष्ट्रपति पद की चुनावी जंग आखिरी दौर में पहुंचने लगी है। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प और उनको चुनौती दे रहे डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन मंगलवार रात 9 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 6.30 बजे) पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट में हिस्सा लेंगे। कुल तीन डिबेट होंगी। दूसरी 15 और तीसरी 22 अक्टूबर को होंगी। यहां हम आपको इन डिबेट्स से जुड़ी जरूरी जानकारियां दे रहे हैं।

पहले ये जानिए
कोरोनावायरस की वजह से इस बार तस्वीर कुछ बदली नजर आएगी। मॉडरेटर एक ही होगा। पैनालिट्स नहीं होंगे। दर्शक होंगे या नहीं, या होंगे तो कितने? इस बारे में डिबेट कमीशन ने फिलहाल जानकारी नहीं दी है। हाथ मिलाने की ऐतिहासिक परंपरा भी इस बार नहीं निभाई जाएगी। सीएनएन के मुताबिक, मॉडरेटर और कैंडिडेट्स मास्क नहीं पहनेंगे। ट्रम्प की पत्नी मेलानिया और बेटी इवांका दर्शकों के स्थान पर मौजूद रहेंगी।

पहली डिबेट : 29 सितंबर 2020
वक्त : रात 9 बजे (भारतीय समय के अनुसार, बुधवार सुबह 6.30 बजे)
कहां : केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी, क्लीवलैंड (ओहायो)
कितनी देर : 90 मिनट (कोई ब्रेक नहीं होगा)
मॉडरेटर : फॉक्स न्यूज के एंकर क्रिस वॉलेस होंगे। 2016 में ट्रम्प और हिलेरी क्लिंटन की पहली डिबेट भी वॉलेस ने कराई थी।
मुद्दे : कुल 6 मुद्दे होंगे। ये इस तरह हैं- दोनों कैंडिडेट्स के रिकॉर्ड्स, सुप्रीम कोर्ट, कोरोनावायरस, इकोनॉमी, नस्लवाद-हिंसा और इलेक्शन इंटीग्रिटी यानी चुनावी अखंडता।

दूसरी डिबेट : 15 अक्टूबर 2020
वक्त : फिलहाल तय नहीं
कहां : एड्रियन एर्स्ट सेन्टर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स, मायामी
कितनी देर : 90 मिनट
मॉडरेटर : C-SPAN के पॉलिटिकल एडिटर स्टीव सुली। टाउन हॉल स्टाइल डिबेट होगी। दर्शक शामिल होंगे, संख्या तय नहीं।
मुद्दे : कमिशन ऑन प्रेसिडेंशियल डिबेट (सीपीडी) तय करेगा। घोषणा एक हफ्ते पहले होगी।

तीसरी डिबेट : 22 अक्टूबर 2020
वक्त : फिलहाल तय नहीं
कहां : बेलमॉन्ट यूनिवर्सिटी, नेश्विल
कितनी देर : 90 मिनट
मॉडरेटर : एनबीसी की व्हाइट हाउस संवाददाता क्रिस्टीन वेकर। वे प्रेसिडेंशियल डिबेट मॉडरेट (अकेले) करने वाली दूसरी अश्वेत महिला हैं। पहली कैरोल सिम्पसन थीं।
मुद्दे : 6 मुद्दे होंगे। इन्हें सीपीडी तय करेगा। घोषणा एक हफ्ते पहले होगी।

अप्रूवल रेटिंग क्या
चुनाव में सिर्फ पांच हफ्ते बाकी हैं। न्यूज वीक के मुताबिक, नेशनल अप्रूवल रेटिंग में बाइडेन राष्ट्रपति ट्रम्प से 10 पॉइंट आगे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें महामारी और हेल्थ केयर जैसे मुद्दों पर उन्हें ज्यादा समर्थन मिल रहा है। एबीसी न्यूज और वॉशिंगटन पोस्ट के पोल के मुताबिक, बाइडेन 54-44 से आगे हैं। हालांकि, कुछ वोटर्स ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि ट्रम्प जल्द ही कोविड-19 पर काबू पा लेंगे।

वाइस प्रेसिडेंशियल डिबेट
कब : 7 अक्टूबर 2020
कहां : साल्ट लेक सिटी की उटाह यूनिवर्सिटी (किंग्सवरे हॉल)
मॉडरेटर : सुसान पेज। वे यूएसए टुडे की वॉशिंगटन ब्यूरो चीफ हैं।
मुद्दे : एक हफ्ते पहले सीपीडी ऐलान करेगा। 9 मुद्दे होंगे। हर कैंडिडेट को 10 मिनट मिलेंगे।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
फोटो 19 अक्टूबर 2016 की है। तब डोनाल्ड ट्रम्प और हिलेरी क्लिंटन ने तीसरी और आखिरी प्रेसिडेंशियल डिबेट में हिस्सा लिया था। यह डिबेट लास वेगास की नेवादा यूनिवर्सिटी में हुई थी।


https://ift.tt/2HIBNOt

Comments

Popular Posts

आप शेयर ट्रेडिंग करते हैं तो यह जानना आपके लिए जरूरी है; एक सितंबर से बदल रहा है मार्जिन का नियम

शेयर बाजार में एक सितंबर से आम निवेशकों के लिए नियम बदलने वाले हैं। अब वे ब्रोकर की ओर से मिलने वाली मार्जिन का लाभ नहीं उठा सकेंगे। जितना पैसा वे अपफ्रंट मार्जिन के तौर पर ब्रोकर को देंगे, उतने के ही शेयर खरीद सकेंगे। इसे लेकर कई शेयर ब्रोकर आशंकित है कि वॉल्युम नीचे आ जाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह नया नियम और आपकी ट्रेडिंग को किस तरह प्रभावित करेगा? सबसे पहले, यह मार्जिन क्या है? शेयर मार्केट की भाषा में अपफ्रंट मार्जिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक है। यह वह न्यूनतम राशि या सिक्योरिटी होती है जो ट्रेडिंग शुरू करने से पहले निवेशक स्टॉक ब्रोकर को देता है। वास्तव में यह राशि या सिक्योरिटी, बाजारों की ओर से ब्रोकरेज से अपफ्रंट वसूली जाने वाली राशि का हिस्सा होती है। यह इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग से पहले वसूली जाती है। इसके अलावा स्टॉक्स में किए गए कुल निवेश के आधार पर ब्रोकरेज हाउस भी निवेशक को मार्जिन देते थे। यह मार्जिन ब्रोकरेज हाउस निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी। इसे ऐसे समझिए कि निवेशक ने एक लाख रुपए के स्टॉक्स खरीदे हैं। इस...

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...