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मलबे में दबकर 3 की मौत, 3 को बचाया गया, 3 की तलाश जारी; 30 साल पुरानी इमारत में मरम्मत के दौरान हुआ हादसा

गुजरात में वडोदरा के बावनपुरा में सोमवार देर रात एक चार मंजिला इमारत गिरने से एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई। एक बच्चे समेत तीन लोगों को बचा लिया गया है। अभी तीन लोगों के दबे होने का अनुमान है। सरकारी अमला बचाव अभियान में जुटा है। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग करीब 30 साल पुरानी थी। इसकी मरम्मत का काम चल रहा था।

मलबे से दो शव और एक बच्चे समेत चार लोगों को जिंदा निकाला गया। बाद में इनमें से एक की मौत हो गई।

ज्यादातर पीड़ित मजदूर थे, जो घटना के समय बिल्डिंग में सो रहे थे। मारे गए लोगों के नाम गोपी, राजू और रमेश हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे में बिल्डिंग का मालिक भी घायल हुआ है। घायलों को शहर के एसएसजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।

बिल्डिंग के नीचे पर्किंग में खड़े कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है।

इमारत एक ओर झुक गई थी
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह इमारत काफी पहले ही एक तरफ झुक गई थी। प्रशासन को कई बार इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।



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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बिल्डिंग एक तरफ झुक गई थी। प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।


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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 100 साल, जिसके लिए महात्मा गांधी भीख मांगने को तैयार थे

दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (राष्ट्रीय इस्लामी विश्वविद्यालय) एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है, जो आज 100 साल पूरे कर रही है। 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में छोटी संस्था के तौर पर शुरू होकर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने तक की इसकी कहानी कई संघर्षों से भरी है। गांधीजी के कहने पर ब्रिटिश शासन के समर्थन से चल रही शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार शुरू हुआ था। राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखी। यह संस्था शुरू से ही कांग्रेस और गांधीजी के विचारों से प्रेरित थी। 1925 में आर्थिक सेहत बिगड़ी तो गांधीजी की सहायता से संस्था को करोल बाग, दिल्ली लाया गया। तब महात्मा गांधी ने यह भी कहा था- जामिया को चलना होगा। पैसे की चिंता है तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं। बापू की इस बात ने मनोबल बढ़ाया और संस्था आगे बढ़ती रही। भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन महज 23 साल की उम्र में जामिया...