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51 दिन वेंटिलेटर पर रहकर जीती कोरोना से जंग, इतने दिन भर्ती रहने वाले कांग्रेस नेता भरतसिंह पहले एशियाई

(समीर राजपूत) पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भरतसिंह सोलंकी ने 101 दिन तक कोरोना से लड़ाई लड़ी और जीत गए। गुरुवार को उन्हें अहमदाबाद के सिम्स अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इस दौरान वे 51 दिन तक वेंटिलेटर पर भी रहे। अस्पताल का दावा है कि कोरोना के इलाज के लिए 101 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने वाले वे पहले एशियाई हैं। जब उन्हें दाखिल किया गया था, तब उनके फेफड़े पत्थर जैसे सख्त हो गए थे।

वेंटिलेटर पर रखने के बावजूद उनका ऑक्सीजन लेवल बढ़ नहीं रहा था। उन्हें 100% ऑक्सीजन दिए जाने के बाद भी 85% ऑक्सीजन मिल रही थी। हालांकि, चार डॉक्टरों, नर्सिंग, पैरामेडिकल अपने फिजियोथेरेपिस्ट स्टाफ के साथ 12 लोगों की टीम उनके इलाज में जुटी हुई थी।

सिम्स के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अमित पटेल ने बताया कि 67 साल के भरतसिंह कोरोना पाॅजिटिव आने के बाद 10 दिनों तक वडोदरा में इलाज कराते रहे। उसके बाद 30 जून को उन्हें सिम्स में भर्ती कराया गया। उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तत्काल वेंटिलेटर पर रखा गया।

शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर उन्हें दिन में 4-5 बार ‘लंग्स प्रोनिंग रिक्रूटमेंट थेरेपी’ दी गई। इससे 15-20 दिनों में उनकी ऑक्सीजन की जरूरत घटने लगी। लेकिन उनके फेफड़े और खून में बैक्टीरियल और फंगस इंफेक्शन होने लगा। मल्टीपल एंटीबॉयोटिक से इन्हें इंफेक्शन मुक्त किया गया। इस दौरान उनके स्नायुतंत्र कमजोर हो गए और पांच प्लाज्मा फेरासिस कराने के बाद 51 दिनों तक वेंटिलेटर पर आईसीयू में रखा गया।

डॉक्टर बोले- चुनौती ऑक्सीजन लेवल को बनाए रखने की थी

भरतसिंह को वेंटिलेटर पर रखने के बावजूद उनका ऑक्सीजन लेवल बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। अगर ऑक्सीजन लेवल कम होता तो दो से चार दिनों में ही उनका हार्ट बंद होने और शरीर के अन्य अंगों के काम न करने का खतरा था। इसके लिए उन्हें ‘लंग्स प्रोनिंग रिक्रूटमेंट थेरेपी’ दी गई। चूंकि उनका वजन ज्यादा था इसलिए थेरेपी देने में भी काफी मुश्किल आई। थेरेपी दिए जाने के बाद उनकी स्थिति लगातार सुधरती गई। उनका वजन भी 25 से 30% घट गया। अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।



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अस्पताल में बातचीत करते भरतसिंह।


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