Skip to main content

पढ़िए, टाइम मैगजीन की इस हफ्ते की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

1. अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में संसद भवन की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हिंसक समर्थकों से नरमी बरतने का आरोप है। पूर्व पुलिस अधिकारियों ने पुलिस की ढील को पक्षपात और रंगभेद बताया है। इसके अलावा भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पूर्व अधिकारियों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं पढ़िए इस स्टोरी में।

2. ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का व्यवहार अब भी पूरी तरह से वैज्ञानिकों को समझ नहीं आ रहा है। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या नई नस्ल से लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ेंगे या अधिक मौतें होंगी। वैज्ञानिक नए स्ट्रेन का व्यवहार समझने के लिए संक्रमित मरीजों के अधिक सैम्पल की जांच कर रहे हैं। वायरस के नए स्ट्रेन के बारे में वैज्ञानिकों को और क्या मिला पढ़िए इस स्टोरी में।

3. केपिटल बिल्डिंग में समर्थकों के हिंसक उपद्रव से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चौतरफा नुकसान उठाना पड़ेगा। रिपब्लिकन पार्टी पर उनकी मजबूत पकड़ ढीली हो रही है। कई पूर्व सहयोगी मानते हैं कि उनके साथ 10-12 दिन सरकार में रहना भी असहनीय है। उनके सहयोगियों ने ट्रम्प के बारे में और क्या कहा, पढ़िए इस स्टोरी में।

4. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थकों ने 6 जनवरी को अमेरिकी संसद भवन में उपद्रव किया। इस घटना ने सोशल मीडिया की भूमिका पर फिर सवाल खड़े किए हैं। ट्रम्प पिछले कई साल से सोशल मीडिया के जरिये गलत जानकारियां और साजिश रचने वाला प्रचार कर रहे हैं। टि्वटर, फेसबुक ने अब जाकर ट्रम्प पर बंदिश लगाई है। लोगों ने सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कैसे गुस्सा दिखाया पढ़िए इस स्टोरी में।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Read, this week's selected stories of Time magazine with just click Here


https://ift.tt/3bqh1zB

Comments

Popular Posts

आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे कोरोना मरीजों के बीच बिताए, फिर भी संक्रमण से सुरक्षित

शहर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 40,522 हो गया है। गुरुवार को 556 नए केस मिले। तीन मरीजों की मौत भी हुई। हालांकि 35 हजार से ज्यादा ठीक भी हो चुके हैं। 12 नवंबर के बाद से जिस तेजी से मरीज मिल रहे हैं, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में छह हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी मिसाल हैं, जो इन आठ महीनों में एक हजार से ज्यादा घंटे मरीजों के बीच बिता चुके हैं। बमुश्किल 300 संक्रमित हुए। मास्क की सावधानी बरतते हुए ये कोराना से बचे हुए हैं। मरीजों को गले भी लगाती हैं, लेकिन पलभर के लिए मास्क नहीं हटातीं पीपीई किट पहनकर सुबह-शाम मरीजों के पास जाती हूं, उनकी काउंसलिंग भी करती हूं। जरूरत पड़ने पर गले भी लगाती हूं। अस्पताल के मरीज कल्पना दीदी के नाम से जानने लगे। 8 महीने में एक दिन ऐसा नहीं गया, जब कोविड वार्ड न गई हूं, पर हमेशा मास्क और ग्लव्स पहने रही। मास्क तो पलभर के लिए भी नहीं हटाती। इन सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कर कोरोना से बचे रहे। -कल्पना पिल्लई, इंचार्ज सिस्टर अरबिंदो अस्पताल सुबह 8 से रात 10 तक पानी नहीं पीते, ताकि मास्क न हटाना पड़े सात महीने से रोज राउंड ले रहा हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मास्...

जिन दुकानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी पूजा सामग्री मिलती थीं, वहां अब पीपीई किट और दस्ताने बिक रहे

निगमबोध घाट पहुंची 32 साल की कुसुम के पिता की मौत आज सुबह ही कोरोना से हुई है। वे दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में बीते पांच दिनों से भर्ती थे। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके पिता के शव को सील करके अपनी ही गाड़ी से निगमबोध घाट पहुंचाया है। अस्पताल के ही दो कर्मचारी पीपीई किट पहने इस शव को घाट तक लेकर आए हैं। कुसुम ने आखिरी वक्त में अपने पिता का चेहरा भी नहीं देखा था, लिहाजा वे निगमबोध घाट के सेवादारों से हाथ जोड़कर और बिलखते हुए प्रार्थना कर रही हैं कि उन्हें एक आखिरी बार अपने पिता का चेहरा देखने की अनुमति दी जाए। निगमबोध घाट के एक सेवादार कुसुम को समझाते हैं कि कोरोना संक्रमित शवों का चेहरा खोलने की अनुमति नहीं है और ऐसा करने से संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। लेकिन, अपने पिता के अंतिम दर्शन की कुसुम की जिद को देखते हुए ये सेवादार इसकी अनुमति दे देते हैं। कुसुम के पिता के शव को वापस उसी गाड़ी में कुछ देर के लिए रखा रखा जाता है, जिसमें अस्पताल से उन्हें यहां लाया गया था। पीपीई किट पहने दो लोग शव का चेहरा कुछ सेकंड के लिए खोलते हैं और जल्द ही शव को दोबारा सील करके चिता पर रख द...

लॉकडाउन में महिलाओं के खातों में 32% इजाफा, इनमें 70% पहली बार शेयर में इन्वेस्ट कर रहीं

कोरोना संकट के दौरान शेयर बाजार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिलाएं गोल्ड बाॅन्ड से लेकर म्यूचुअल फंड तक में निवेश कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार में निवेश करने वाली महिलाओं में अधिकतर पहली बार निवेश कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में वर्किंग वुमन्स और हाउस वाइफ हैं। ये महिलाएं ना सिर्फ शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं, बल्कि दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं। आइए पढ़ते हैं ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी, जो मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा रही हैं... अंकिता तोलानी - वर्किंग अंकिता तोलानी 28 साल की हैं। दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में जाॅब करती हैं। अंकिता 2016 से शेयर मार्केट में पैसे लगा रही हैं। वो SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और गोल्ड बाॅन्ड में निवेश करती हैं। अंकिता कहती हैं,'पहली बार मैंने SIP में 1 लाख रुपए से निवेश शुरू किया था। अब हर साल डेढ़ से दो लाख रुपए निवेश करती हूं।' अंकिता पिछले तीन साल में करीब 10 लाख से ज्यादा निवेश कर चुकी हैं। वहीं, गोल्ड बाॅन्ड में अंकिता अब तक 7 लाख रुपए तक निवेश कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि उन्हें गोल्ड बाॅन...