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दिल्ली सरकार की बढ़ाई चिंता:दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामले को लेकर दिल्ली सरकार का आदेश, कोरोना आरक्षित बेड पर करें डेंगू का इलाज



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ओडिशा की चिल्का लेक जहां 100 से ज्यादा गांवों के डेढ़ लाख लोगों की जिंदगी मछली पर टिकी है, जाति चाहे कोई भी हो, सब मछुआरे हैं

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑक्स-बो लेक (झील) चिल्का के बीचबसे करीब 100 से अधिक गांवों के डेढ़ लाख लोगों की आजीविका मछली पर ही टिकी है। जाति कोई भी हो, यहां सब मछुआरे ही हैं। कोरोनाकाल में यहां की मछलियों की डिमांड कम हो गई है। सिर्फ 10% सप्लाई ही कोलकाता या दूसरे जगहों पर हो पा रही हैं। चिल्का लेक में 160 से भी ज्यादा प्रकार की मछलियों मौजूद हैं। बोटिंग के साथ-साथ यहां फिशिंग करने की सुविधा भी है। यहां इरावदी डॉल्फिनसबसे ज्यादा पाई जाती हैं 70 किलोमीटर लंबी और 30 किमी चौड़ी इस झील का पानी दिसंबर से जून तक खारा रहता है, लेकिनबरसात में मीठा हो जाता है। यहां पर कई लोग सेव चिल्का की टोपी पहने दिखाई दे जाते हैं, जो यहां की बायोडायवर्सिटी,प्रवासी पक्षियों और मशहूर डॉल्फिन को बचाने के लिए लोगों को जागरूक करते हैं। इरावदी प्रजाति की डॉल्फिन यहांसबसे अधिक संख्या में पाई जाती हैं। चिल्का के पास बसे करीब 100 गांवों के लिए मछली ही आय का मुख्य सोर्स है, कोरोना की वजह से इसकी डिमांड कम हो गई है। चिल्का झील अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। यहां 6 विशाल द्वीप हैं- परीकुड़, फूलबाड़ी, ...