लॉकडाउन के बाद भुखमरी की कगार पर आ चुका एक तबका है सेक्स वर्कर का। इनकेपास न सरकारी सुविधाएं हैं, न कानून, न योजनाएं।यहां तक की समाज की सहानुभूति भी इनके हिस्से नहीं आती। यौनकर्मियों के लिए काम करने वाले संगठन ‘ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्सवर्कर्स’ (एआईएनएसडब्लू) की अध्यक्ष कुसुम का कहना है कि ‘यौनकर्मियों को सबसे ज्यादा दिक्कत लॉकडाउन खत्म होने के बाद आएगी। क्योंकि प्रवासी मजदूर जो शहरों में रह रहे थे, वो अपने घर जा चुके होंगे। ज्यादतर इनके क्लाइंट वही थे। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक देश में लगभग 9 लाख सेक्सवर्कर हैं। हालांकि, एआईएनएसडब्लू इस आंकड़ों को जमीनी हकीकत नहीं मानती हैं। उसके मुताबिक देश में सेक्स वर्कर की संख्या तीस लाख से भी ज्यादा है। 'लॉकडाउन ने हमारे काम पर एकदम से ताला लगा दिया' तर्क ये है कि इनमें घरेलू महिलाएं, प्रवासी महिलाएं और दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिलाओं की भी एक बड़ी तादाद शामिल है। उन्हीं महिलाओं में शामिल रांची की सोहानी भी हैं। कहती हैं- ‘लॉकडाउन ने हमारे काम पर एकदम से ताला लगा दिया है। हम किसी को कह भी नहीं सकते कि हम क्या करते ह...
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